10, 20 और 50 के नोट बाजार से हो रहे गायब, RBI ने बंद कर दी छपाई? कांग्रेस ने वित्त मंत्री को लिखी चिट्ठी

Sanchar Now
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नई दिल्‍ली. बाजार में छोटे मूल्‍य वर्ग यानी 10, 20 और 50 रुपये के नोट की कमी की शिकायत बार-बार आ रही है. अब कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने छोटे नोटों की बाजार में कम उपलब्‍धता का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इन नोटों की छपाई बंद कर दी है. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण का लिखे पत्र में टैगोर ने कहा कि मार्केट में इन नोटों की भारी कमी है. इसकी वजह से ग्रामीण और शहरी इलाकों में गरीबों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्‍होंने वित्‍त मंत्री से छोटे मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों की कमी को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की भी मांग की है.

गौरतलब है कि वित्‍त वर्ष 2023-24 में मौजूद कुल करेंसी में 500 रुपये के वेल्यू वाले नोट की हिस्सेदारी मार्च, 2024 तक 86.5 थी. 31 मार्च, 2024 तक मात्रा के हिसाब से 500 रुपये के सर्वाधिक 5.16 लाख नोट मौजूद थे, जबकि 10 रुपये के नोट 2.49 लाख संख्या के साथ दूसरे स्थान पर रहे. हालांकि, छोटे नोटों की कमी की शिकायतें अक्‍सर आती ही रहती हैं. रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023-24 में आरबीआई ने नोट प्रिंटिंग पर 5,101 करोड़ रुपये खर्च किए थे. वहीं, एक साल पहले की इसी अवधि यानी 2022-23 में आरबीआई (RBI) ने नोट की प्रिंटिंग (Note Printing) पर 4,682 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.

छोटे नोट न छापने का आरोप

मणिकम टैगोर तमिलनाडु के विरुधुनगर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद हैं. वित्‍त मंत्री को लिखे पत्र में टैगौर ने लिखा, “ वित्‍त मंत्री जी, मैं आपका ध्यान एक गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहता हूं जो लाखों नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी गरीब समुदायों को प्रभावित कर रहा है. ₹10, ₹20 और ₹50 मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों की गंभीर कमी ने भारी असुविधा और कठिनाई पैदा कर दी है.” टैगोर ने पत्र में लिखा कि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन नोटों की छपाई बंद कर दी है ताकि यूपीआई और कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा दिया जा सके. उन्‍होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का प्रयास समझ में आता है, लेकिन इसके लिए छोटों नोटों की छपाई बंद करने का कदम उन लोगों को प्रभावित कर रहा है जिनके पास डिजिटल भुगतान अवसंरचना तक पहुंच नहीं है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.

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मौलिक अधिकार का उल्‍लंघन

टैगोर ने लिखा कि सरकार का यह निर्णय नागरिकों के मुद्रा तक पहुंच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है. छोटे नोट दैनिक लेन-देन के लिए आवश्यक है. इनकी कमी के कारण कारण छोटे व्यवसायों, सड़क विक्रेताओं और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों के सामने कई तरह की कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं, जो नकद लेन-देन पर अत्यधिक निर्भर हैं.

ये की मांग

मणिकम टैगार ने वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारणम से मांग की कि वो RBI को छोटे मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों की छपाई और वितरण फिर से शुरू करने का निर्देश दें. सार्वजनिक मांग को पूरा करने के लिए इन नोटों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और डिजिटल विभाजन को दूर करने और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान अवसंरचना तक पहुंच में सुधार के उपाय किए जाएं. ताकि हाशिए पर खड़े समुदायों की कठिनाइयों को कम किया जा सके.

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