उत्तरकाशी: सुरंग में फंसीं 40 जिंदगियां, रेस्क्यू के 48 घंटे… टनल में 900 mm की स्टील पाइप डालकर लोगों को निकालने की कोशिश

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ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा से डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा अचानक टूटने से करीब 40 श्रमिक अंदर फंस गए. निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे 40 श्रमिकों को निकालने के लिए बचाव अभियान तीसरे दिन भी जारी है. आधी रात से ही 900 मिमी व्यास वाले पाइपों से लदे ट्रक सिल्क्यारा पहुंच चुके है और ऑगर ड्रिलिंग मशीन के लिए प्लेटफार्म तैयार कर लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक मलबे के बीच क्षैतिज रूप से ड्रिल करने और एमएस पाइप डालने के लिए बरमा मशीन के लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है ताकि फंसे हुए श्रमिकों को धातु के पाइप के माध्यम से बाहर निकाला जा सके.ये पाइप फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए रास्ता बनाएंगे.

ऑगर मशीन के लिए तैयार कर लिया गया प्लेटफार्म

बचावकर्मियों ने कहा कि फंसे हुए 40 श्रमिकों के स्थान तक पहुंचने के लिए टीमों को अभी भी लगभग 35 मीटर अधिक मलबा साफ करना होगा. ऑगर मशीन के लिए प्लेटफार्म तैयार कर लिया गया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को बचाव कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया. धामी ने कहा, “मैंने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और स्थलीय निरीक्षण किया और बचाव कार्यों पर लगातार नजर रख रहा हूं. बचाव कार्यों के लिए हरिद्वार और देहरादून से बड़े व्यास वाले ह्यूम पाइप भेजने की व्यवस्था की गई है. इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भी मुख्यमंत्री धामी से फोन पर बात की और सुरंग के अंदर फंसे 40 श्रमिकों के बारे में जानकारी ली.

‘श्रमिकों को बचाने में लग सकता है एक दिन’

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से श्रमिकों के बारे में पूछताछ की है.
उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने सोमवार को कहा था कि श्रमिकों को बचाने में एक दिन और लग सकता है. उन्होंने कहा कि 60 मीटर मलबे में से 20 मीटर से अधिक मलबा हटा दिया गया है और उन्हें मंगलवार रात तक अंदर फंसे 40 लोगों को निकालने की उम्मीद है. उन्हें पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन, भोजन और पानी सहित सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. फंसे हुए लोगों के परिवार के सदस्यों से भी संपर्क किया गया है. ऊपर से लगातार गिरने वाली ढीली मिट्टी रेस्क्यू ऑपरेशन में रुकावट पैदा कर रही है. इसके चलते पाइप डाला जाएगा, ताकि मलबे को रोका जा सके और फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचा जा सके.

बचाव अभियान तीसरे दिन भी जारी

सिल्कयारा सुरंग 4531 मीटर लंबी है और इसका निर्माण 853.79 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है. राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरंग 21 मीटर तक टूट गई है और बचाव प्रयास जारी हैं.

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