भगवान विष्णु के 10 अवतार, सूर्य-शंख-गदा… जानें- गर्भगृह में विराजमान रामलला की मूर्ति में क्या है खास

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22 जनवरी के बाद जब श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम खत्म हो जाएगा, तब भक्तों को श्रीराम तीन रूपों में दर्शन देंगे. हम, आप और पूरी दुनिया के रामभक्त ये जानना चाहते हैं कि मंदिर के गर्भगृह में रखी मूर्ति कैसी है? वो श्रीराम का स्वरूप देखना चाहते होंगे. श्रीराम की इस मूर्ति का रंग रूप, लोगों के सामने आ गया है. राम मंदिर के गर्भगृह में रखी गई प्रतिमा की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर चल रही हैं.

श्रीराम के बाल रूप की प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में बेहद आकर्षक प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा के लिए रखी गई है. काले रंग के पत्थर से बनी ये चमकदार मूर्ति श्रीराम के बाल रूप की है. इसको भी ढंका गया है. प्राण प्रतिष्ठा के वैदिक नियमों के मुताबिक प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन, पूजन के बाद मूर्ति की आंखों से पट्टियां हटाई जाएंगी. तब श्रीराम का दिव्य रूप भक्तों के दर्शन के लिए तैयार हो जाएगा.

तस्वीरें मूर्ति बनने की प्रक्रिया के दौरान की हैं

लेकिन उससे पहले ही इस मूर्ति की कई तस्वीरें मीडिया के सामने आ गई हैं. ये तस्वीरें मूर्ति बनने की प्रक्रिया के दौरान की हैं. इसकी एक तस्वीर में श्रीराम हाथों में तीर और धनुष लेकर खड़े हैं. इसी तरह की एक तस्वीर में श्रीराम मुस्कुराते हुए दिख रहे हैं. इसके अलावा भी कई तस्वीरें सामने आई हैं. राम मंदिर के गर्भगृह में जो मूर्ति स्थापित की जानी है, वो फिलहाल गर्भगृह में ही है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जब आप श्रीराम के दर्शन के लिए मंदिर के गर्भगृह में जाएंगे, तो आपको वहां 3 मूर्तियां मिलेंगी. ये तीनों मूर्तिया अलग-अलग प्रकार की हैं.

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– मुख्य प्रतिमा ‘शालिग्राम पत्थर’ से बनी है, जो काले रंग की है. इसकी प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है.
– दूसरी प्रतिमा चांदी से बनी है. इस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी 22 जनवरी को ही होगी.
– तीसरी प्रतिमा वो बालरूप है जो अभी तक अस्थाई मंदिर में स्थापित किया गया था. इस बालरूप को यहां लाया जाएगा.
-देखा जाए तो तीनों प्रतिमाएं राममंदिर के गर्भगृह में स्थापित होंगी. लेकिन मुख्यरूप से 5 वर्षीय बालक की तरह दिखने वाली मूर्ति ही मुख्य मूर्ति कहलाएगी.
-श्याम वर्ण यानी काले रंग वाला ये स्वरूप ‘शालिग्राम’ पत्थर से बनाया गया गया है. ये मूर्ति विशेष रूप से शालिग्राम पत्थर से इसलिए बनाई गई क्योंकि श्रीराम को भगवान विष्णु का एक अवतार माना जाता है.
-शालिग्राम पत्थर को भगवान विष्णु का विग्रह यानी अंश स्वरूप माना जाता है. शालिग्राम पत्थर आमतौर पर नेपाल में गंडक नदी में पाए जाते हैं. नेपाल के सालग्राम गांव के नाम पर ही इन पत्थरों को शालिग्राम कहा जाता है.
-श्रीराम की पूरी प्रतिमा की ऊंचाई सवा 4 फीट यानी 51 इंच है, और चौड़ाई 3 फीट यानी 36 इंच है.
-श्रीराम की इस प्रतिमा का वज़न 200 किलो है.

श्रीराम की चांदी की प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में दूसरी मूर्ति चांदी से बनी प्रतिमा है. जिसका वजन 10 किलो है. प्राण प्रतिष्ठा में स्थापित होने वाली मूर्ति को मंदिर परिसर में घुमाया जाना था. लेकिन शालिग्राम पत्थर से बनी मूर्ति का वजन ज्यादा होने की वजह से, 10 किलो चांदी से बनी मूर्ति का भ्रमण करवाया गया. इस मूर्ति को पालकी में रखकर मंदिर परिसर में घुमाया गया था. इसके अलावा तीसरी प्रतिमा, श्रीराम की वही प्रतिमा होगी, जो अस्थाई राम मंदिर में पूजा के लिए स्थापित की गई थी. रामलला की ये प्रतिमा भी बालरूप है, जिसमें वो नवजात बालक की तरह दिखाई देते हैं.

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शालिग्राम पत्थर से बनी मूर्ति ही होगी अचल

लेकिन इन सबमें अचल यानी स्थापित होने के बाद कहीं ना ले जाने वाली मूर्ति शालिग्राम पत्थर से बनी मूर्ति ही होगी. इस मूर्ति की कारीगरी और खूबसूरती वर्षों तक, मूर्तिकार अरुण योगीराज की याद दिलाएगी, जिन्होंने पत्थर को तराशकर, श्रीराम के बालरूप के दर्शन भक्तों को कराए. अब हम आपको संपूर्ण प्रतिमा की विशेषता के बारे में बताने जा रहे हैं.

-इस मूर्ति के निचले हिस्से में कमल का आसन बना हुआ है, जिस पर श्रीराम खड़े हैं.
-श्रीराम के पैरों की तरफ दाहिनी ओर रामभक्त हनुमान जी को दिखाया गया है और बाईं ओर श्री विष्णु के वाहन गरुड़ जी को दिखाया गया है.
-इस प्रतिमा में भगवान विष्णु के 10 अवतारों को भी दिखाया गया है. श्रीराम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं. इस तरह से अगर हम सतयुग से लेकर कलियुग तक भगवान विष्णु के 10 अवतारों का क्रम देखें तो इन सभी का चित्रण इसमें किया गया है.
-प्रतिमा में भगवान राम के दाहिने हाथ की ओर श्री विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह और वामन अवतार दिखते हैं. वहीं भगवान राम के बाईं ओर परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतार का स्वरूप दिखाया गया है.
-श्रीराम की इस प्रतिमा में उनके सिर के ऊपर सूर्य देव को दिखाया गया है. यहां हम आपको बताना चाहते हैं कि श्रीराम सूर्यवंशी थे, इस वजह से उनके सिर की तरफ सूर्य देव को दिखाया गया है.
-इसके अलावा प्रतिमा में स्वस्तिक, ऊँ, शंख, चक्र और गदा के चिन्ह भी दिखाये गए है. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चक्र और गदा भगवान विष्णु के हाथों में भी होते हैं.
-मूर्ति में भगवान श्रीराम के बाल भी दिखाए गए हैं. इसके अलावा इनके शरीर पर अंगवस्त्र भी दिखाया गया. इसी के साथ-साथ मूर्ति में ही श्रीराम के गले में आभूषण भी दिखाए गए हैं.
-प्राण प्रतिष्ठा के दिन संपूर्ण श्रृंगार के वक्त श्रीराम के दाहिने हाथ में एक तीर और बाएं हाथ में धनुष भी दिया जाएगा. इसके अलावा इस दिन श्रीराम के माथे पर हीरा भी लगाया जाएगा, जो श्रीराम के श्रृंगार का ही हिस्सा होगा.

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आंखों को अभी ढंका गया है..

प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही किसी प्रतिमा में ईश्वर का वास माना जाता है. यही वजह है कि गर्भगृह में रखी श्रीराम की इस प्रतिमा की आंखों को अभी ढंका गया है. 22 जनवरी को जब प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपूर्ण होगा, तब श्रीराम पूरे विश्व को अपने बालरूप में दर्शन देंगे.

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