न पिंजड़े, न ड्रोन, न जाल… अब रोने की आवाज से फंसाया जाएगा आदमखोर भेड़िया

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बहराइच/राजीव शर्मा: जिले में आतंक का पर्याय बने आदमखोर अल्फा भेड़िए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी रणनीति अपनाई है. भेड़ियों के एक गिरोह के पांच सदस्यों को पकड़ने के बाद भी गिरोह का मुखिया अल्फा भेड़िया इलाके में दहशत फैला रहा है. महसी क्षेत्र में लगातार हमले कर रहा यह छठवां भेड़िया वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है.

आदमखोर के लिए अब ‘प्रेम जाल’

वन विभाग अब अल्फा भेड़िए को फांसने के लिए उसकी बिछड़ी हुई मादा भेड़िए की करुण पुकार का सहारा ले रहा है. विभाग ने मादा भेड़िए की चीखने और रोने की ‘प्री रिकॉर्डेड’ आवाज को उन क्षेत्रों में लाउडस्पीकर पर बजाना शुरू किया है, जहां अल्फा भेड़िए की गतिविधियां देखी गई हैं.

वन विभाग की रेस्क्यू टीम का मानना है कि मादा की आवाज सुनकर अल्फा उसे तलाशता हुआ आएगा और इस दौरान घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया जाएगा. इसके लिए विभाग ने कई इलाकों में पिंजड़े लगाए हैं और साउंड सिस्टम भी स्थापित किया है. उम्मीद की जा रही है कि मादा भेड़िए की आवाज सुनकर अल्फा भेड़िया आकर्षित होगा और जाल में फंस जाएगा.

भेड़िये को फंसाने के लिए ड्रोन और जाल रहे नाकाम

भेड़िए को पकड़ने के लिए अब तक कई तरीके अपनाए गए हैं. खेतों में जाल बिछाए गए, ड्रोन से निगरानी की गई, यहां तक कि हाथी की लीद, बच्चों के यूरिन से भीगी टेडी डॉल्स, पटाखे और थर्मल ड्रोन तक का इस्तेमाल किया गया, लेकिन भेड़िया अभी तक पकड़ में नहीं आया.

क्या कामयाब होगा वन विभाग का नया प्रयोग

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अब वन विभाग का यह नया प्रयोग मादा भेड़िए की चीखने और रोने की आवाज पर आधारित है. लाउडस्पीकर की आवाज को इस तरह से सेट किया गया है कि यह असली मादा भेड़िए की तरह ही लगे, न बहुत तेज और न ही धीमी. विभाग को उम्मीद है कि अपनी बिछड़ी हुई मादा की आवाज सुनकर अल्फा भेड़िया पिंजरे की ओर खिंचा चला आएगा और उसे पकड़ लिया जाएगा.

वन विभाग ने अब इस नई योजना पर अपनी पूरी उम्मीदें लगा रखी हैं, ताकि इलाके को इस खतरनाक भेड़िए के आतंक से मुक्त किया जा सके.

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