जाने-माने उद्योगपति रतन टाटा का निधन, मुंबई के अस्पताल में ली आखिरी सांस

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जमशेदपुर: देश के उद्योग जगत के जाने माने उद्योगपति रतन नवल टाटा के निधन की खबर मिलते ही जमशेदपुर शहर में शोक की लहर है. शहर के दुर्गा पूजा समितियों ने पूजा पंडाल में माइक गीत संगीत और कई कार्यक्रम को बंद कर दिया है. उनकी निधन में पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने शोक व्यक्त किया है.

रतन के निधन के बाद जमशेदपुर में दुर्गा पूजा मेले में कार्यक्रम और साउंड सिस्टम बंद कर दिया गया. उनके निधन पर पूरा जमशेदपुर मर्माहत है. 1991 में 21 वर्ष की उम्र में रतन टाटा टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने थे. इस दौरान उन्होंने टाटा ग्रुप को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया. वे 2012 तक टाटा ग्रुप में चेयरमैन पद पर रहे.

रतन टाटा के निधन पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा है कि ‘हम अत्यंत क्षति की भावना के साथ श्री रतन नवल टाटा को विदाई दे रहे हैं. रतन नवल टाटा, सचमुच असाधारण व्यक्तित्व वाले इंसान थे जिनके अतुलनीय योगदान ने न केवल टाटा को आकार दिया है, समूह बल्कि हमारे राष्ट्र के बेहतर निर्माण के लिए भी खड़े रहे. टाटा समूह के लिए श्रीमान रतन टाटा एक चेयरपर्सन से कहीं अधिक थे. मेरे लिए वह एक गुरु थे मार्गदर्शन और मित्र थे. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने उत्कृष्टता, अखंडता और नवाचार का विस्तार किया. वैश्विक पदचिह्न हमेशा अपने नैतिक दिशा निर्देश के प्रति सच्चे रहे. परोपकार और समाज के विकास के प्रति टाटा के समर्पण ने प्रभावित किया है लाखों लोगों का जीवन शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, उनकी पहल ने गहरी जड़ें जमा ली हैं. जिससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ होगा. पूरे टाटा परिवार की ओर से मैं उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. उनकी विरासत हमें प्रेरित करती रहेगी क्योंकि हम उनके सिद्धांतों को कायम रखने का प्रयास करेंगे.’

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जमशेदपुर के पूर्व सांसद कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ अजय कुमार ने रतन नवल टाटा के निधन पर गहरा शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह भारतीय उद्योग जगत के अपूर्णीय क्षति है.जमशेदपुर के विकास में रतन टाटा का बड़ा योगदान है. रतन टाटा ने टाटा समूह को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्ती भूमिका निभाई थी. उन्होंने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए अन्य उद्योग समूहों के लिए एक मानक स्थापित किया. कोरोना के समय में रतन टाटा ने बड़ा दिल दिखाते हुए देश के लोगों के बेहतरी के 1500 करोड़ रुपये खर्च किए थे. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

वहीं, रतन टाटा के निधन की खबर सुनते ही दुर्गा पूजा कमेटियों ने अपने पूजा पंडाल में आयोजित कार्यक्रम को बंद कर दिए. कई जगहों पर मेले में लगे झूले भी बंद कर दिए गए. कई जगहों पर ऐलान कर दिया गया कि रतन टाटा के अंतिम संस्कार तक मेले में किसी तरह का सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होगा. गीत संगीत भजन भी नहीं बजेगा.

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