30 करोड़ी पिंटू महरा… महाकुंभ में नाविकों का नायक या खलनायक?

Sanchar Now
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प्रयागराज के उस नाविक परिवार की चर्चा हर जगह हो रही है जिसकी सक्सेस स्टोरी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूरे देश को सुनाई थी. सीएम योगी जब महाकुंभ की सफलता का श्रेय ले रहे थे, तब उन्होंने यूपी विधानसभा में इस परिवार की कामयाबी का किस्सा सुनाया था. सीएम योगी ने बताया था कि कैसे इस परिवार ने 45 दिन चले महाकुंभ में अपनी 130 नावों के जरिए करीब 30 करोड़ रुपये कमाए.

इसके बाद तो इस परिवार के गली-गली चर्चे शुरू हो गए. हालांकि सीएम योगी की सक्सेस स्टोरी का ये हीरो परिवार अपराध की दुनिया का शातिर खिलाड़ी है. जैसे ही सीएम योगी ने यूपी विधानसभा में इस नाविक का जिक्र किया. प्रयागराज का पिंटू महरा परिवार पूरे देश के फोकस में आ गया. लोग बातें करने लगे कि एक नाविक, नाव चलाकर 30 करोड़ रुपये कैसे कमा सकता है. किसी ने इसे महाकुंभ में उमड़ी करोड़ों वाली आस्था की भीड़ का असर बताया तो कुछ लोगों को सीएम योगी का ये दावा हजम नहीं हुआ. वो बोट की संख्या और किराया के हिसाब-किताब लगाकर कमाई के आंकड़ों का सच निकालने में जुट गए.

सीएम योगी की तारीफ के बाद परिवार भी काफी खुश था. घर में मीडिया के कैमरों का जमावड़ा लगा था. पूरा परिवार एक साथ बैठकर अपनी कामयाबी का किस्सा सुना रहा था. इस बीच नाविक पिंटू महरा परिवार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में पता चला है कि नाविक पिंटू महरा समेत परिवार के ज्यादातर सदस्य शातिर अपराधी हैं. इनके अपराधों का एक लंबा चौड़ा रिकॉर्ड रहा है. नाविक परिवार के तमाम सदस्य जेल जा चुके हैं.

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पिंटू महरा के खिलाफ गंभीर धाराओं में 21 आपराधिक मुकदमे हैं दर्ज

आपको जानकर हैरानी होगी कि नाविक परिवार के मुखिया पिंटू महरा के खिलाफ गंभीर धाराओं में 21 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. यही नहीं उसके खिलाफ 2 बार गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा चुकी है. नाविक पिंटू महरा के परिवार का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. परिवार के पांच सदस्यों की दबंगई और वर्चस्व की लड़ाई में हत्या भी हो चुकी है. आसपास के इलाके में परिवार की छवि दबंगों और माफिया जैसी है.

कई बार जेल जा चुका है पिंटू

इस नाविक परिवार के मुखिया पिंटू महरा के खिलाफ पहला केस 2005 में दर्ज हुआ था, जब इसकी उम्र महज 23 साल थी. पिंटू के खिलाफ 21 मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी मांगने जैसे गंभीर क्रिमिनल केस दर्ज हैं. साल 2010 और 2016 में इसके खिलाफ गैंग्स्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई. इसके अलावा 2013 और 2015 में गुंडा एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ. पिंटू महरा कई बार जेल जा चुका है और कई सालों तक जेल में रहने के बाद वो कुछ महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया है. आरोप है कि जेल में रहते हुए भी वो लोगों को धमकाने का काम करता था, इसके चलते उसकी जेल भी बदली गई थी. इसकी हिस्ट्री शीट प्रयागराज के नैनी थाने में खुली हुई है, अकेले पिंटू महारा नहीं बल्कि इसके पिता से लेकर भाई तक सबकी क्राइम प्रोफाइल रही है.

पिंटू का पिता राम सहारे उर्फ बच्चा महरा भी शातिर अपराधी

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नाविक पिंटू महरा की क्राइम वाली कहानी सिर्फ इतनी भर नहीं हैं. पिंटू का पिता राम सहारे उर्फ बच्चा महरा भी शातिर अपराधी था. बच्चा महरा की मौत जेल में रहते हुए 25 जून 2018 को हुई थी. पिंटू का बड़ा भाई आनंद महरा भी शातिर अपराधी और हिस्ट्रीशीटर था. रंगदारी और वसूली को लेकर हुए विवाद में कुछ साल पहले उसकी हत्या दो अन्य लोगों के साथ कर दी गई थी. पिंटू महरा का एक और भाई अरविंद महरा है, वो भी हार्डकोर क्रिमिनल है. जेल जा चुका है और जमानत पर छूटा हुआ है.

संगम किनारे एक पूरा बोट रैकेट चलाता पिंटू

इसके अलावा ये पिंटू प्रयागराज में संगम किनारे एक पूरा बोट रैकेट चलाता है. नाव चलाना सिर्फ इसका दिखावा है बल्कि इसका असल काम नाव चलाने वालों से रंगदारी वसूलना है. आतंक ऐसा है कि बिना इस परिवार की मर्जी के कोई अपनी नाव लहरों में उतार भी नहीं सकता.

पिंटू महरा का साम्राज्य कितना बड़ा है. इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ये परिवार कुंभ और माघ मेलों में चेकर्ड प्लेटें यानि लोहे की प्लेट की सड़कें बनाने और बिजली के सबस्टेशन तैयार करने और लाइन बिछाने का काम भी करता है. पिंटू महरा की मां शुक्लावती देवी बिजली विभाग की रजिस्टर्ड ठेकेदार हैं. अब आपके लिए नाविक पिंटू के 30 करोड़ कमाने का राज खोलते हैं.

एक नाव से रोजाना 6400 रुपये की कमाई

महाकुंभ के दौरान प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने अलग अलग घाटों से संगम तक जाने का किराया 75 से 160 रुपये तय किया था. एक नाव पर दो चालकों के साथ अधिकतम आठ लोग ही बैठ सकते थे.  महाकुंभ के दौरान कई दिन नावों का संचालन बंद भी था. अगर मान लिया जाए कि महरा की कुल 130 नावों ने रोजाना संगम के आठ चक्कर लगाए. हर बार अधिकतम आठ श्रद्धालु बैठे और सभी ने औसतन सौ रुपये किराया दिया तो इस हिसाब से एक नाव से रोजाना 6400 रुपये की कमाई हुई.

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सरकारी रेट पर 30 करोड़ की कमाई मुमकिन नहीं

इस तरह 130 नावों से पूरे महाकुंभ के दौरान अधिकतम 3 करोड़ 74 लाख 40 हजार रुपये की ही कमाई संभव है. यानि सरकारी रेट पर 30 करोड़ की कमाई मुमकिन नहीं है. ये तब ही संभव है जब श्रद्धालुओं से मनमाने ढंग से मोटी रकम वसूल की गई हो. हालांकि पिंटू का परिवार कह रहा है कि श्रद्धालुओं ने खुश होकर जो टिप या बख्शीश दी है, वो भी इसमें शामिल है.

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