किसानों ने प्राधिकरण पर लगाया वादाखिलाफी आरोप, मागे पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

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संचार न्यूज़। ग्रेटर नोएडा के दर्जनों गांवों के किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 2 मई से किसान अपनी मांगों को लेकर प्राधिकरण के बहार महापड़ाव में जुटे हुए हैं। किसानों की मांग है कि नए भूमि अधिकरण के तहत किसानों को मिलने वाले सभी लाभ प्राधिकरण की तरफ से दिया जाए।

इसके साथ ही भूमिहीनों को प्राधिकरण की तरफ से मिलने वाले प्लॉट दिए जाएं और रोजगार के लिए भी किसानों को मिलने वाली राशि प्राधिकरण के द्वारा प्रभावित परिवारों को दी जाए। लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नए भूमि अधिग्रहण के नियमों का उल्लंघन करते हुए किसानों को मिलने वाली सुविधाएं खत्म कर दी है इन्हीं सभी मांगों को लेकर किसान प्राधिकरण के बाहर महापड़ाव में डटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा किसानों का यह महापड़ाव आंदोलन लगातार चलता रहेगा।

दरअसल, ग्रेटर नोएडा के दर्जनों गांव के किसान अपनी मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय पर महापड़ाव के रूप में आंदोलन कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि 7 फरवरी को किसान सभा के नेतृत्व में प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की थी जिस क्रम में 14 मार्च व 23 मार्च और 25 अप्रैल से किसानों ने प्राधिकरण के बाहर आंदोलन सुरु कर दिया। जिसके बाद 2 मई को किसानों की प्राधिकरण से दोबारा वार्ता हुई जिसमें प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों की मांगो और मुद्दों को हल करने पर सहमति नहीं बनी। प्राधिकरण के अधिकारियों की बैठक में कोशिश रही कि किसानों को आश्वासन के आधार पर धरना समाप्त करने के लिए राजी किया जाए परंतु किसान प्राधिकरण की इस चाल को बखूबी समझते हुए वही प्राधिकरण के बाहर महापड़ाव में धरने के लिए बैठ गई और किसानों का धरना अभी भी दिन रात चल रहा है।

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अखिल भारतीय किसान सभा के प्रवक्ता रुपेश वर्मा ने बताया कि किसान अपनी मांगों को लेकर 25 अप्रैल से प्राधिकरण के बाहर महापड़ाव में जमे बैठे हैं। किसानों की मांग है कि गजराज सिंह बनाम राज्य एवं अन्य में हाईकोर्ट के फैसले के संदर्भ में ठाकुर जयवीर सिंह की अध्यक्षता में समिति गठित की सिफारिश है। इस सिफारिश में 64% मुआवजा और 10% आवासीय प्लॉट सभी प्रभावित किसानों को देने की बात कही गई है। 64% मुआवजे की सिफारिश को प्राधिकरण ने 91वी बोर्ड बैठक में पास कर दिया और 10% आबादी प्लॉट के संबंध में किसानों से वादा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने जाएं आपको 10% का लाभ प्राधिकरण अपने स्तर पर दे देगा। उसके बाद 64% मुआवजा उठाते हुए किसानों से गजराज सिंह के फैसले से संतुष्ट होने का शपथ पत्र भी प्राधिकरण ने ले लिया। जिससे किसान 10% आबादी प्लॉट के लिए हाईकोर्ट भी नहीं जा सके। इस तरह प्राधिकरण ने किसानों के साथ न केवल वादाखिलाफी की बल्कि उन्हें झूठा आश्वासन दे कर हाई कोर्ट जाने कि उनके अधिकार से भी वंचित कर दिया। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण कि इस वादाखिलाफी से किसानों में भारी आक्रोश है जिसको लेकर किसान प्राधिकरण के खिलाफ प्राधिकरण पर महापड़ाव में जुटे हुए हैं।

इसके साथ ही रुपेश वर्मा ने बताया कि सभी किसान नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट का 4 गुना मुआवजा एवं शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का 2 गुना मुआवजा देने का प्रावधान है। कानून में जिस प्रोजेक्ट के लिए जिन लोगों की भी जमीन ली जाएगी उन्हें प्रोजेक्ट अफेक्टेड फैमिली कहां गया है और सभी को एक समान लाभ की बात की गई है परंतु प्राधिकरण ने कानून का उल्लंघन करते हुए क्षेत्र में ग्राम पंचायतों को समाप्त कर दिया। जिससे कि जिन गांवों में जमीन की खरीद हो रही है वह शहरी क्षेत्र में परिभाषित हो जाए प्राधिकरण ने अपनी आवंटन दरों में 2014 के बाद से कई बार बढ़ोतरी कर ली है इसी तरह डीएम के स्तर पर होने वाले सर्किल रेट में भी शहरी क्षेत्रों में कई बार वृद्धि की जा चुकी है परंतु गांव के सर्किल रेट में 2014 से 2023 तक 8 वर्ष के दौरान कोई वृद्धि नहीं हुई है प्राधिकरण ने जानबूझकर किसानों की जमीन के भाव 4250 रुपए तक सीमित किए हैं वहीं जिन गांवों में खरीद हो रही है वह बोली लगाकर इंडस्ट्री के प्लॉट 70 से 72 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से बेची जा रही है इस तरह प्राधिकरण किसानों को लूट कर मुनाफाखोरी कर रहा है किसान सभा सर्किल रेट के 4 गुना मुआवजा एवं कानून के अनुसार सभी लाभ प्रभावित किसानों को समान रूप से देने की मांग कर रहा है।

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इसके साथ ही धरना दे रहे किसानों का कहना है कि प्राधिकरण ने एक 100 वर्ग मीटर के न्यूनतम प्लॉट का साइज 40 मीटर किया और बाद में इसे भी समाप्त कर दिया इस तरह प्राधिकरण ने आवासीय स्कीमों में किसानों के साढे 17% कोटे को खत्म कर दिया प्राधिकरण ने 3 दिसंबर 2010 के शासनादेश के अनुसार हर प्रभावित परिवार को रोजगार देने की नीति को आज तक लागू नहीं किया है इसी तरह पटवारी समझौते के तहत भूमिहीनों को 40 वर्ग मीटर के प्लॉट से भी वंचित कर दिया गया।

किसान सभा ने धरना स्थल पर दिल्ली में धरना दे रहे पहलवानों के समर्थन के प्रस्ताव पास किए हैं और मांग की कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज कर मुकदमा चलाया जाए और उन्हें कुश्ती संघ से बर्खास्त किया जाए। वही किसानों ने बताया कि किसान सभा के दृढ़ संकल्प के साथ हर गांव में संगठन तैयार कर प्राधिकरण पर महापड़ाव डाला है जब तक उनके मुद्दे उनकी मांगों को प्राधिकरण पूरा नहीं करेगा किसान महापड़ाव मैं जुटे रहेंगे और प्राधिकरण के खिलाफ अपना प्रदर्शन करते रहेंगे।

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