ग्रेटर नोएडा। युवक की गोली मारकर हत्या के दोषी को आजीवन कारावास, 14 साल बाद मिला न्याय

Sanchar Now
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ग्रेटर नोएडा | संचार नाउ |
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित दनकौर थाना क्षेत्र में हुए युवक शहजाद की निर्मम हत्या के मामले में 14 साल बाद न्याय की गूंज सुनाई दी है। गौतमबुद्ध नगर की प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्रा (ADJ-1) की अदालत ने इस हत्या के दोषी लोकेंद्र को आजीवन कारावास की सजा व तिलक चंद को तीन वर्ष की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 60 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।

अभियोजन अधिकारी धर्मेंद्र जैंत ने बताया कि यह वारदात 15 दिसंबर 2011 को दनकौर क्षेत्र में उस समय हुई जब शहजाद नामक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, हत्या व्यक्तिगत रंजिश और आपसी विवाद का नतीजा थी। शहजाद पर उस समय जानलेवा हमला किया गया जब वह अपने काम से लौट रहा था। हमलावरों ने उसे नज़दीक से गोली मारी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतक के चाचा भंवर सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि लोकेंद्र व दो अन्य साथियों ने उसके भतीजे शहजाद को उसके सामने गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। भंवर सिंह इस हत्या का मुख्य चश्मदीद गवाह बना। हत्या की वजह आपसी रंजिश और पुरानी दुश्मनी बताई गई थी।

 अदालत में क्या हुआ?

मामले की सुनवाई जिला न्यायालय में चली। अभियोजन अधिकारी धर्मेंद्र जैंत ने बताया कि कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। प्रमुख गवाहों में भंवर सिंह का बयान निर्णायक साबित हुआ, जिन्होंने अदालत में घटना को विस्तार से बताया।

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पुलिस और अभियोजन की कार्रवाई:

हत्या के बाद दनकौर थाना में IPC की धारा 302/34, 120-B के तहत एफआईआर दर्ज हुई। इसमें मुख्य आरोपी थाना दनकौर निवासी लोकेंद्र  को नामजद किया गया। इस मामले में सहआरोपी तिलक चंद को बनाया गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन अधिकारी धर्मेंद्र जैंत द्वारा अदालत में 26 से अधिक गवाहों को पेश किया गया, जिनमें चश्मदीद, पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट शामिल थे।

अदालत ने आजीवन कारावास की सुनाई सजा

14 वर्षों तक चले मुकदमे के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कहा की यह हत्या पूर्व नियोजित थी। अपराधियों ने सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दी और एक युवक की जान ली। ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में कानून का डर बना रहे। अदालत ने लोकेंद्र को आजीवन कारावास (life imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही ₹55,000 का जुर्माना भी लगाया है। वही तिलक्चन्द को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है और ₹5,000 का जुर्माना लगाया है। यदि अर्थदंड ( जुर्माना) अदा नहीं किया गया तो 6 महीने अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। दोनों आरोपियों के द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

 

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