आज से शुरू हो गया GST बचत उत्सव, एक क्लिक में जानें क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा

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आज से देश में जीएसटी 2.0 (GST) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही पूरे भारत में खरीदारों को रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान की जाने वाली राशि में बदलाव देखने को मिलेंगे। कई चीजें सस्ती हो रही हैं जिससे लोगों को भारी फायदा होगा। जीएसटी 2.0 से पहले रविवार को पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कल से अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू होंगे। जीएसटी बचत उत्सव शुरू होगा, जिससे घरों, दुकानदारों, किसानों और व्यवसायों की बचत बढ़ेगी और साथ ही भारत की विकास यात्रा को गति मिलेगी।

नए कर ढांचे को आवश्यक वस्तुओं और आम बाजार के उत्पादों को ज़्यादा किफायती बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि विलासिता वाले उत्पादों पर बोझ बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि किराने के बिल, डेयरी और उपकरणों पर कुछ राहत मिलेगी, लेकिन प्रीमियम शराब, सिगरेट या बड़ी मोटरसाइकिल जैसी विलासिता की चीजो की कीमतें बढ़ जाएंगी। वहीं, ट्रेनों में बिकने वाला रेल नीर बोतलबंद पानी भी सस्ता होगा।

रसोई में राहत

राहत की शुरुआत रसोई की मेज पर होती है। भारत के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड अमूल ने मक्खन, घी और पनीर से लेकर चॉकलेट, बेकरी स्नैक्स और फ्रोजन उत्पादों तक 400 से अधिक वस्तुओं पर कीमतों में कटौती की घोषणा की है।मध्य प्रदेश के घरों में इस्तेमाल होने वाला सांची घी लगभग 40 रुपये सस्ता हो जाएगा। कर्नाटक में सरकारी ब्रांड नंदिनी घी, मक्खन, प्रोसेस्ड चीज़ और दूध उत्पादों की कीमतों में कटौती कर रही है। खाद्य तेल, पैकेज्ड आटा और साबुन जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी संशोधित दरों के तहत सस्ती होने वाली हैं।

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इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण सस्ते हुए

इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण भी इसका बड़ा फायदा उठा रहे हैं। एयर कंडीशनर और डिशवॉशर कुछ मामलों में 4,500 रुपये से 8,000 रुपये तक सस्ते हो रहे हैं। टेलीविजन, कंप्यूटर मॉनिटर और प्रोजेक्टर पर अब 18% जीएसटी लगेगा, जो पहले ज़्यादा था। 25000 रुपये से कम कीमत वाले एंट्री-लेवल रेफ्रिजरेटर और स्मार्टफोन पर भी जीएसटी में कटौती होगी। त्योहारों पर खरीदारी की योजना बना रहे परिवारों के लिए इससे बेहतर समय और क्या हो सकता है।

कारों और बाइक्स पर भारी छूट

शायद सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाली चीज ऑटोमोबाइल्स हैं। मारुति सुज़ुकी ने ऑल्टो, स्विफ्ट, ब्रेज़ा और बलेनो समेत अपने सभी मॉडलों की कीमतों में 1.2 लाख रुपये तक की कटौती की है। दोपहिया वाहन खरीदारों को भी बेहतर सौदे मिलेंगे। सुजुकी ने 350 सीसी तक की बाइक और स्कूटर की कीमतें कम कर दी हैं, जिससे हज़ारों रुपये की बचत हो रही है। जिक्सर SF-250 जैसी मिड-रेंज मोटरसाइकिलें अब कम कीमत पर मिल रही हैं।

निर्माण और आवास संबंधी सामग्री सस्ती हुई

निर्माण और आवास संबंधी सामग्री संगमरमर, ग्रेनाइट, चूने की ईंटें और हस्तशिल्प भी कम दरों पर उपलब्ध होंगी, जिससे बिल्डरों और कारीगरों को कुछ राहत मिली है।

स्कूल और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी जरूरी चीजें टैक्स-फ्री

बच्चों की शिक्षा और जरूरी चीजों को भी फायदा होगा। किताबें, पेंसिल, रबड़ और नोटबुक अब स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम के साथ 0% जीएसटी श्रेणी में आ गई हैं, जिससे ये कर-मुक्त हो गई हैं। ये छोटी-मोटी बचत लग सकती है, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए, हर बचत काफी होती है। इसके अलावा, कई चीजें अब जीएसटी से मुक्त हैं, जिनमें स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम भी शामिल हैं।

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जीएसटी 2.0 के तहत क्या महंगा होगा?

नए जीएसटी में जहां जरूरी चीजें सस्ती होंगी, वहीं विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर अधिक टैक्स लगेगा। सिगरेट, पान मसाला, गुटखा और चबाने वाले तंबाकू को 40% जीएसटी की ऊंची दर में डाल दिया गया है।

कोल्ड ड्रिंक जैसे पेय पदार्थों और चीनी युक्त शीतल पेय पर भी अधिक टैक्स देना पड़ेगा। ऑटोमोबाइल प्रेमियों के लिए इसका असर बड़ी बाइक्स पर पड़ेगा: 350 सीसी से ऊपर के मॉडल, जैसे रॉयल एनफील्ड की हिमालयन या 650 सीसी सीरीज, ज्यादा महंगे होंगे। लग्जरी कारें और एसयूवी, खासकर आयातित मॉडल, नए डिमेरिट वर्गीकरण के तहत महंगे होने की उम्मीद है। प्रीमियम शराब और आयातित घड़ियां भी उच्च टैक्स के दायरे में आएंगी।

उत्पादों के एमआरपी की दोबारा जांच करें

नई जीएसटी दरें लागू होने के साथ ही खरीदारों को पैकेज्ड सामान खरीदते समय सावधानी बरतनी होगी। 22 सितंबर से पहले बने उत्पादों पर पुराना और संशोधित एमआरपी दोनों दिखाई दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, 50 रुपये के मूल एमआरपी वाले बिस्कुट के पैकेट पर अब 48 रुपये दिखाई दे सकते हैं। कुछ दुकानदार अभी भी पुरानी कीमत वसूल सकते हैं, इसलिए हमेशा पैकेज और बिल की जांच करें।

कंपनियों को अब अखबारों में संशोधित एमआरपी का विज्ञापन करने की जरूरत नहीं है, उन्हें बस डीलरों और कानूनी अधिकारियों को अपडेट करना होगा। पुरानी पैकेजिंग का इस्तेमाल 31 मार्च, 2026 तक या स्टॉक खत्म होने तक किया जा सकता है, और एमआरपी को स्टिकर, स्टैम्प या डिजिटल प्रिंटिंग के जरिए सही किया जा सकता है।

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