हिंदी रंगमंच के स्तंभ पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

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हिंदी के प्रख्यात रंगकर्मी और नाटककार-लेखक दया प्रकाश सिन्हा का आज शुक्रवार को सुबह 9 बजे उनके नोएडा स्थित निवास पर निधन हो गया. वह 90 वर्ष के थे और दो महीने से बीमार थे. उनके निधन से साहित्य और रंगमंच की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है. कला और सृजन के क्षेत्र अहम योगदान के लिए दया प्रकाश सिन्हा को भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था. इसके अलावा 2021 में उनके नाटक ‘सम्राट अशोक’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था.

रंगकर्मी दया प्रकाश सिन्हा अपने कार्यक्षेत्र में डीपी सिन्हा के नाम से जाने जाते थे. बतौर आईएएस अधिकारी उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण पद पर संभाले. अपने प्रशासकीय दौर में कई किस्म की सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जाने गए. कला के विकास के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे. उनका जन्म सन् 1935 में कासगंज में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई मैनपुरी, फिर फैजाबाद और उच्च शिक्षा इलाहाबाद में हुई थी. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना सारा समय सृजन को समर्पित कर दिया था.

भारत भवन में निदेशक पद से रिटायर्ड

नाटककार डीपी सिन्हा ने शिक्षा पूरी करने के बाद सबसे पहले इलाहाबाद में ही अध्यापन कार्य किया था, उसके बाद पिता की इच्छा से प्रशासनिक सेवा में गए. सिन्हा 2 मई, सन् 1993 में भोपाल स्थित भारत भवन के निदेशक पद से रिटायर्ड हुए थे. वह उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अलावा ललित कला अकादमी के भी अध्यक्ष रहे. साथ ही फिजी में भारत के पहले सांस्कृतिक सचिव के रूप में भी सेवा दी थी. साहित्य अकादमी के अलावा संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, लोहिया सम्मान और हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान से भी नवाजे जा चुके हैं.

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अपने नाटकों में प्रयोग के लिए जाने गए

डीपी सिन्हा नाटक और रंगमंच के क्षेत्र में अनेक सफल प्रयोग के लिए भी जाने जाते हैं. सम्राट अशोक जैसी चर्चित कृति के अलावा उन्होंने सीढ़ियां, कथा एक कंस की, इतिहास चक्र और रक्त अभिषेक जैसे हिंदी नाटक भी लिखे हैं. उनके नाटकों में इतिहास के साथ-साथ वर्तमान भी झांकता है. सिन्हा वस्तुत: अपनी रचनाओं में सांस्कृतिक पुल बनाते हैं.

सिन्हा अपनी रचनाओं में इतिहास की बुनियाद पर मौजूदा दौर की विकृतियों पर भी तंज कसते हैं. लक्ष्मीनारायण लाल जैसे प्रख्यात नाटककार से प्रभावित थे, जिनकी रचनाएं सामाजिक ताना-बाना के चित्रण के लिए जानी जाती रही हैं.उन्होंने लाल के नाटक ताजमहल के आंसू में अभिनय भी किया था.

डीपी सिन्हा की अन्य प्रसिद्ध पुस्तकें

उनकी अन्य प्रसिद्ध पुस्तकें हैं- सांझ सवेरे, अपने-अपने दांव, सादर आपका, हास्य एकांकी, इतिहास और रक्त-अभिषेक आदि. सम्राट अशोक साल 2015 में प्रकाशित हुआ था. उनकी पुस्तक ‘कथा एक कंस की’ को दिल्ली विश्वविद्यालय समेत देश के पांच अन्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया था.

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