लड़कियों को घर में सुकून मिलता था, ड्रिंक करतीं, खेलती, डांस करतीं…; निठारी कांड पर मोनिंदर पंढेर

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मोनिंदर सिंह पंढेर का बयान एक ऐसे वक्त में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उनकी दोषमुक्ति की पुष्टि की है। मोनिंदर सिंह पंढेर के नौकर सुरिंदर कोली को रिहा करते हुए कोर्ट ने कहा कि मुकदमेबाजी में साक्ष्य की कमी और पुलिस की जांच में खामियां थीं। इसके बाद कई पीड़ित परिवारों ने सवाल उठाया है कि अगर पंढेर और कोली दोषी नहीं तो फिर फिर हमारे बच्चों का हत्यारा कौन है?

पीड़ितों के चेहरों पर अनगिनत सवाल

दरअसल, नोएडा के कुख्यात निठारी कांड के दोनों आरोपी अदालत से तो बरी हो गए, लेकिन अब इस मामले में पीड़ितों के चेहरे पर अनगिनत सवाल भी दिख रहे हैं। दूसरी ओर इस मामले में आरोपी रहे कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी कोठी पर लड़कियां आती थीं। उन्हें उनके पास रहकर सुकून मिलता था। वह उनकी कोठी पर खाना खाती थीं, नाचती थीं और आराम करती थीं। कई बार लड़कियों के साथ उनके पति भी आते थे, लेकिन वो निठारी बस्ती की लड़कियां नहीं थीं। पंढेर ने कोठी पर महिला सेक्स वर्करों के आने के पीछे की मंशा पर जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में पेड सेक्स कभी मुद्दा नहीं था। जो लड़कियां कोठी पर आती थीं, वह मेरे बहुत करीब थीं। उन्हें मेरे घर पर सुकून मिलता था।

11 नवंबर को अदालत ने सुनाया फैसला

नोएडा के निठारी कांड में 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी रहे सुरिंदर कोली को भी निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया, जबकि कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर पहले ही बरी किए जा चुके थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरिंदर कोली को जिन सबूतों के आधार पर पिछली अदालतों ने दोषी ठहराया और सजा दी, वह कानूनी तौर पर अवैध, अविश्वसनीय और विरोधाभासी हैं। दूसरी ओर, 17 साल से अधिक जेल में रहने के बाद बरी हुए मोनिंदर सिंह पंढेर ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है।

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नाले में मिले बच्चों और लड़कियों के कंकाल

घटना साल 2005-06 की है, जब नोएडा में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे बहने वाले नाले से कई बच्चों और लड़कियों के कंकाल बरामद हुए थे। उस समय पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली पर रेप, हत्या और अंग तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। लेकिन हाल ही में अदालतों ने दोनों को बरी कर दिया है और पंढेर ने कुछ ऐसे दावे किए हैं, जो पुनः विवादों को हवा दे रहे हैं। मोनिंदर सिंह पंढेर का कहना है कि असली जांच को मीडिया ट्रायल, राजनीतिक दबाव और पुलिस की गंभीर लापरवाही ने शुरुआत से ही गलत दिशा में धकेल दिया।

लड़कियों के साथ दोस्ताना रिश्ता

मोनिंदर सिंह पंढेर ने बताया कि कोठी में एस्कॉर्ट आती थीं। दिस वॉज नॉट टोटली ए सेक्सुअल रिलेशन। (यह पूरी तरह से सेक्स संबंध बनाने के लिए नहीं था) कुछ लड़कियां मेरे काफी करीब थीं। उनको मेरे घर पर सुकून मिलता था। पंढेर ने बताया कि सेक्सुअल संबंध हमेशा मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा कि कई लड़कियों के साथ उनका रिश्ता दोस्ताना और देखभाल वाला था। कोठी में लड़कियों को खाना दिया जाता था, शराब की अनुमति होती थी, वे नाचती थीं, हंसती थीं, खेलती थीं। पंढेर के मुताबिक, कभी-कभी लड़कियों के पति भी उनके घर आते थे और कोली को इस सब की पूरी जानकारी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि निठारी बस्ती की लड़कियां उनके घर नहीं आती थीं।

सुरिंदर कोली अच्छा इंसान, उन्हें फंसाया गया

इंडिया टुडे से बातचीत में पंढेर ने दावा किया कि उन्हें और कोली को बिना किसी पुख्ता सबूत के फंसाया गया। उनका कहना था कि कोली उन्हें शुरू से ही सामान्य और अच्छा इंसान लगा, और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के भटकने का नतीजा थे। उन्होंने यह भी कहा कि CBI ने किसी भी हत्या या दुष्कर्म में उनके खिलाफ चार्जशीट तक दायर नहीं की, जबकि पुलिस उन्हीं सवालों पर अटकी रही जो हर दिन अखबारों की सुर्खियों में छपते थे। पंढेर के मुताबिक निठारी क्षेत्र में बच्चों के गायब होने की घटनाएं व्यापक थीं, पर उनका सही मानचित्रण कभी नहीं किया गया।

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महिलाओं का घर आना अपराध नहीं

सुरेंद्र कोली पर लगे आरोपों और उसके व्यवहार को लेकर पंढेर ने कहा कि उन्होंने कभी उसे संदिग्ध नहीं पाया। घर पर महिलाओं के आने की बात उन्होंने स्वीकार की, लेकिन इसे अपराध से जोड़ना गलत बताया। सबसे कठिन सवाल कि मामले का दोषी कौन? इसपर पंढेर ने साफ तौर पर पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर इशारा किया। उनका कहना है कि यदि जांच ठीक से होती तो सच सामने आ जाता, लेकिन व्यवस्था की खामियों ने उन्हें फंसा दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके घर के पीछे से कंकाल बरामद होने की जानकारी उन्हें सबसे बाद में मिली, जबकि वे खुद पुलिस कस्टडी में थे और यह खबर सुनकर सकते में रह गए।

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