नई दिल्ली। संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अध्यक्षों की एक विशेषता उनका धैर्य है। वे शोर मचाने वाले या अत्यधिक उत्साही सदस्यों को भी शांत और मुस्कुराते हुए संभाल लेते हैं।
राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अध्यक्षों के 28वें सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक और संसदीय यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश की जनता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उसकी आकांक्षाओं और सपनों को ध्यान में रखते हुए हमने प्रक्रिया और प्रौद्योगिकी दोनों के माध्यम से लोकतंत्रीकरण को सुनिश्चित किया है। यह लोकतांत्रिक भावना हमारे संस्कार और सोच में गहराई से बस चुकी है।
संविधान सदन का ऐतिहासिक महत्व
तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने संविधान सदन के महत्व पर विचार साझा किए। इस सभा में 42 राष्ट्रमंडल देशों और चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी संसदीय परंपरा और कार्यप्रणाली पर चर्चा करने के लिए उपस्थित थे।
पीएम मोदी ने बताया कि जिस स्थान पर यह सम्मेलन आयोजित हुआ, वही भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण स्थल है। स्वतंत्रता के अंतिम वर्षों में भारत के संविधान की रचना इसी हॉल में हुई थी। भारत के संविधान को लागू हुए अब 75 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उस समय यह सवाल उठाया गया था कि इतनी विविधता में लोकतंत्र टिक पाएगा या नहीं, लेकिन भारत ने इसे अपनी ताकत बना लिया।
लोकतंत्र और देश की प्रगति
पीएम मोदी ने भारत में लोकतंत्र के वास्तविक अर्थ को अंतिम छोर तक डिलीवरी के रूप में बताया। उन्होंने कोरोना संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि इस वैश्विक आपदा के समय भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध करवाई। लोगों की भलाई और कल्याण की यह भावना हमारे लोकतांत्रिक संस्कारों में निहित है।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2024 के आम चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था। लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया था। इसमें 8000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक दल शामिल थे। महिला मतदाताओं की भागीदारी ने भी नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
ग्लोबल साउथ के लिए नई दिशा
प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया जब अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में ग्लोबल साउथ के लिए नए रास्ते बनाने की आवश्यकता है। भारत हर वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूती से उठाता रहा है।
भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे का केंद्र बनाया गया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के नवाचार ग्लोबल साउथ के सभी देशों के लाभ के लिए हैं। ओपन सोर्स तकनीकी प्लेटफॉर्म बनाकर हम अपने साझीदार देशों को भारत जैसी व्यवस्थाएं अपनाने में सक्षम बना रहे हैं।
लोकतंत्र को मजबूत करने वाले कल्याणकारी कानून
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत की सात दशकों से अधिक लंबी संसदीय यात्रा में जनकेंद्रित नीतियों और कल्याणकारी कानूनों ने लोकतंत्र को मजबूत किया है। निष्पक्ष और तटस्थ चुनावी प्रणाली ने सभी नागरिकों के लिए सहभागी लोकतंत्र सुनिश्चित किया है।
लोकसभा और राज्यसभा के प्रयासों से कई अप्रचलित कानूनों को निरस्त किया गया और नए कल्याणकारी कानून लागू किए गए। इससे भारत को आत्मनिर्भर और विकसित देश बनने में मदद मिली है। सम्मेलन में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, अंतर संसदीय संघ की अध्यक्ष डॉ. तुलिया एकसन और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलीला भी उपस्थित थे।

