लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य ही नहीं, बल्कि देश व पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है.
उत्तर प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फॉर्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय और वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है. यूपी देश के सबसे बड़े हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का भार वहन करता है.
इसके अलावा दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं.
आयुष्मान योजना ने बदली गरीब की तकदीर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लागू होने से पहले किसी गरीब परिवार में अगर कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता था तो पूरा परिवार भय और आर्थिक संकट में घिर जाता था. इलाज अधूरा छूट जाता था, क्योंकि न सरकार का सहयोग होता था और न ही संसाधन. आज उत्तर प्रदेश में साढ़े पांच करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रति परिवार पांच लाख रुपए तक की फ्री स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. जो पात्र परिवार किसी कारणवश आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से कवर किया गया है. उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है. प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के फ्री इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्युदर को नियंत्रित करने में सफलता मिली है. संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है. कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है. एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था. मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं. इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी. साल 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया. समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई. मात्र दो वर्षों के अंदर इस बीमारी पर पूरी तरह कंट्रोल कर लिया गया. आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है.
मेडिकल डिवाइस और फार्मा सेक्टर को नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का विकास किया जा रहा है. इसका उद्देश्य सिर्फ आत्मनिर्भर भारत नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की दिशा में आगे बढ़ना है. कोविड काल ने यह सिखाया कि संकट के समय दुनिया अपनी मोनोपोली दिखाती है. ऐसे में देश व प्रदेश को स्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही होगा. मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय और वैद्य जीवक की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा यह मानती रही है कि “नास्ति मूलमनौषधम्” यानि कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं, जिसमें औषधीय गुण न हों. उसी तरह “अयोग्य: पुरुषो नास्ति” यानि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, आवश्यकता सिर्फ सही योजक की होती है.
निवेशकों को यूपी आने का आमंत्रण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग जगत को उत्तर प्रदेश आने का आमंत्रण दिया है. कहा कि प्रदेश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षित वातावरण और सिंगल विंडो सिस्टम उपलब्ध है. उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और फार्मा के क्षेत्र में देश ही नहीं, दुनिया का प्रमुख केंद्र बन सकता है. इस मौके पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर सिंह, सचिव भारत सरकार मनोज जोशी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अमित घोष और औषधि महानियंत्रक भारत सरकार राजीव रघुवंशी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.
UP-IMRAS सॉफ्टवेयर का लोकार्पण, क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए SOPs पुस्तक का किया विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिमोट का बटन दबाकर UP-IMRAS (Integrated Medical Research Application System) सॉफ्टवेयर का लोकार्पण किया. यह अत्याधुनिक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म क्लिनिकल ट्रायल, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज़ से जुड़े अनुसंधान कार्यों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है. इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब शोधकर्ता अपनी सभी अनुसंधान संबंधी आवश्यकताएं, प्रस्ताव और अनुमतियां पूरी तरह ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकेंगे, साथ ही इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी (IEC) की तरफ से अनुमोदन, समीक्षा और निगरानी की पूरी प्रक्रिया भी डिजिटल रूप से इसी प्लेटफॉर्म पर संपन्न होगी, जिससे समय की बचत के साथ-साथ शोध कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) से संबंधित पुस्तक का विमोचन भी किया.

