महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर को लेकर क्या है सीएम योगी का प्लान, अफसरों को दे दिए निर्देश

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लखनऊ। प्रदेश को देश का सबसे बड़ा स्टार्टअप और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई स्टार्टअप नीति-2026 और नई डाटा सेंटर नीति के मसौदे की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ऐसी नीतियां तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जो युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाएं।

उन्होंने वर्ष 2030 तक प्रदेश में दो गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डाटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी तय किया। साथ ही स्टार्टअप गतिविधियों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन गठित करने की भी आवश्यकता बताई।

रविवार को आईटी और इलेक्ट्रानिक्स विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने नई स्टार्टअप नीति के प्रविधानों में भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल सहायता, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन से जुड़े प्रोत्साहनों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

साथ ही महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों व पूर्वांचल और बुंदेलखंड के स्टार्टअप्स को विशेष सहायता देने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2018 में स्टार्टअप रैंकिंग में ‘एस्पायरिंग लीडर’ श्रेणी में रहने वाला उत्तर प्रदेश पिछले वर्ष ‘टॉप परफार्मर’ श्रेणी में आ चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप्स को निवेशकों, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और एक्सेलेरेटर कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें पूंजी, तकनीकी सहयोग, मेंटरशिप और नए बाजारों तक पहुंच मिल सके।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, स्पेस टेक्नोलाजी और हेल्थ-टेक जैसे क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए।

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इसके लिए सेंटर आफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाने और विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों व उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर बल दिया गया। लखनऊ और नोएडा में प्रस्तावित यू-हब को डीप-टेक नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

लखनऊ समेत अन्य शहरों में भी बनेगा डाटा सेंटर क्लस्टर

डाटा सेंटर क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नई डेटा सेंटर नीति को पहले से अधिक आकर्षक, प्रतिस्पर्धी और निवेशक अनुकूल बनाया जाए।

डाटा सेंटर विकास केवल एनसीआर तक सीमित न रहे, बल्कि लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, सीतापुर और अन्य शहरों में भी डाटा सेंटर क्लस्टर विकसित किए जाएं। उन्होंने एआई आधारित उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं और ग्रीन डाटा सेंटर को विशेष प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए।

आईटी व इलेक्ट्रानिक्स विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 21,342.90 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं और 644 मेगावाट क्षमता पर काम चल रहा है। वर्तमान में छह डाटा सेंटर पार्क और दो डाटा सेंटर इकाइयां संचालित हैं।

विभिन्न निवेशकों ने प्रदेश में 5,410 मेगावाट क्षमता के डाटा सेंटर विकसित करने में रुचि दिखाई है, जिनमें करीब 4.90 लाख करोड़ रुपये निवेश की संभावना है।

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