अयोध्या: यूपी में अयोध्या में राम मंदिर के CEO पद के लिए चल रहा इंटरव्यू पूरा हो गया है. 11 और 12 अगस्त को राम जन्मभूमि परिसर में आखिरी दौर के इंटरव्यू हुए. अब चयन समिति सभी उम्मीदवारों के प्रदर्शन को देखेगी और तीन नामों का पैनल तैयार करेगी. इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इनमें से एक नाम पर अंतिम फैसला लेगा.
राम मंदिर के CEO बनने के लिए कुल 5,585 लोगों ने आवेदन किया था. इनमें से 3,877 लोगों ने अपना पूरा CV भी जमा किया था. इन लोगों से उनके काम के अनुभव, बड़े कार्यक्रमों को संभालने, बड़ी संख्या में लोगों के साथ काम करने, भाषा की जानकारी और मंदिर को लेकर उनकी सोच के बारे में जानकारी मांगी गई थी.
1,580 उम्मीदवारों के आवेदन देखे गए
इसके बाद 1,580 उम्मीदवारों के आवेदन को विस्तार से देखा गया. इनमें से करीब 111 लोगों को ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. इस दौरान उनकी बातचीत करने की क्षमता, काम का अनुभव, नेतृत्व करने की क्षमता, तकनीकी जानकारी और भविष्य की योजना को परखा गया.
फिर 16 लोगों को अयोध्या बुलाया गया
ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद 16 लोगों को आमने-सामने बातचीत के लिए अयोध्या बुलाया गया. इनमें सेना के रिटायर्ड अधिकारी, पूर्व IAS और IPS अधिकारी, कॉरपोरेट और उद्योग जगत से जुड़े लोग, शिक्षा और IT क्षेत्र के लोग शामिल थे. इन सभी 16 लोगों की उम्र 50 से 70 साल के बीच है. सभी अपने-अपने क्षेत्र में लंबे समय तक काम कर चुके हैं.
CEO के लिए क्या देखा गया?
अंतिम इंटरव्यू में उम्मीदवारों से मंदिर की व्यवस्था संभालने, बड़े कार्यक्रमों में भीड़ को मैनेज करने, टीम के साथ काम करने और किसी मुश्किल स्थिति में फैसला लेने की क्षमता को लेकर सवाल किए गए. साथ ही उनकी सोच और आगे की योजना के बारे में भी जाना गया.
कौन ले रहा था इंटरव्यू?
CEO चुनने के लिए बनी कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और न्यूक्लियर साइंटिस्ट डॉ. सुरेश हावरे शामिल हैं. इन तीनों के पास न्यायपालिका, सेना और प्रशासन से जुड़ा लंबा अनुभव है.
अब आगे क्या होगा?
अब कमेटी 16 उम्मीदवारों में से सबसे बेहतर लोगों के नाम पर विचार करेगी. इसके बाद तीन नामों का पैनल राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दिया जाएगा. अंतिम नाम का फैसला ट्रस्ट करेगा. 5,585 आवेदनों से शुरू हुई राम मंदिर के CEO की रेस अब सिर्फ तीन नामों तक पहुंचने वाली है. इसके बाद तय होगा कि राम मंदिर की बड़ी जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी.
