लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभारी मंत्रियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर राहत और बचाव कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें।
जिलाधिकारियों से कहा है कि पूरी तरह अलर्ट रहते हुए जिलों के कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रखें। इसके साथ ही मुख्यालय स्तर से भी सभी जिलों की निगरानी की जाए। बाढ़ प्रभावित हर परिवार तक राहत पहुंचे इसे सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
शनिवार को बाढ़ प्रभावित 19 जिलों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बलिया, गोंडा, बहराइच, बाराबंकी, फर्रुखाबाद और लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली।
कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में पका हुआ भोजन और सूखा खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण समय से और व्यवस्थित तरीके से किया जाए। इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी लिया जाए।
उन्होंने नदी कटान वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए। कहा कि जहां नदी की धारा आबादी की ओर बढ़ रही हो या उसका रुख बदल रहा हो, वहां समय रहते ड्रेजिंग करा दी जाए। संवेदनशील स्थानों को पहले से चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि आबादी और कृषि भूमि को कटान से बचाया जा सके। बाढ़ में जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भूमि का पट्टा उपलब्ध कराकर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिलाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने मंडलों और जिलों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और गाजियाबाद के मंडलायुक्तों तथा नोएडा प्राधिकरण के सीईओ से जलभराव वाले क्षेत्रों और जलभराव के कारणों की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि लो-लैंड क्षेत्रों को चिन्हित कर अतिरिक्त पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं। जिन नालों में पानी की निकासी बाधित है, उनकी तत्काल सफाई कराई जाए। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने और जहां इसका उत्पादन हो रहा है वहां छापेमारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी राज्य विश्वविद्यालय परिसर में जलभराव के स्थायी समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी को सहयोग करने के लिए निर्देशित किया।
प्रमुख सचिव नगर विकास को निर्देशित किया कि मुख्यालय स्तर से प्रदेश के सभी 762 नगर निकायों की 24 घंटे निगरानी की जाए। महापौरों के साथ ही नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों को स्थानीय पार्षदों के साथ फील्ड में जाकर जलभराव और सफाई व्यवस्था देखने को कहा। नालों पर से अतिक्रमण तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए।
