लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार-छह में पड़ोसी के 34 कुत्तों का खौफ, मकान बेचने का लगाया बोर्ड

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लखनऊ के जानकीपुरम मोहल्ले में कुत्तों का खौफ ऐसा है कि एक व्यक्ति ने मकान बेचने का बोर्ड लगा दिया है। उसके पड़ोसी के घर में एक दो नहीं 34 कुत्ते पले हुए हैं।

लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार-6 में एक घर में पले 34 कुत्तों से परेशान पड़ोसी इतना आजिज आ गया कि उसने घर के बाहर मकान बचने की तख्ती लगा दी है। बुजुर्ग दंपती ने कुछ दिन पहले ही मकान को खरीदा था। बगल में इतने सारे कुत्तों के रहने से वह दंपत्ति परेशान हो चुके हैं। आजिज आकर उन्होंने यह बोर्ड घर के सामने लगा दिया है।

इस बोर्ड में साफ-साफ लिखा है कि ” कुत्तों के आतंक और झूठे आरोप के कारण ये मकान बिकाऊ है।” दीक्षा त्रिवेदी ने संपर्क करें। वहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां के एक घर में 34 से अधिक कुत्ते पले हैं। यह कुत्ते पूरे दिन घर के बाहर घूमा करते हैं। आते-जाते लोगों को दौड़ाते हैं और कई बार काट भी चुके हैं।

नगर निगम में शिकायत भी की गई थी और नगर निगम भी नोटिस जारी कर बैठ गया। नगर निगम में जो शिकायत की गई है कि उसमें इन कुत्तों की संख्या 35 बताई गई है। जिसमें से 34 देशी कुत्ते हैं और एक कुत्ता विदेशी नस्ल का है।

नगर निगम लखनऊ ने एक नोटिस जारी करते हुए उस मकान मालिक से कहा है कि संज्ञान में आया है कि आपके यहां 35 कुत्ते पले हुए हैं। जो कानून के विरुद्व है। ये कुत्ते सेक्टर-छह में सी 6/ 984 में पले हैं। इसके पड़ोस में ही एक घर है। यह घर अभी तक खाली था। अभी कुछ दिनों पहले ही यहां लोग रहने आए हैं। लेकिन कुछ ही दिनों में कुत्तों को लेकर इस तरह से परेशान हो गए कि गृह मालकिन दीक्षा त्रिवेदी ने घर के बाहर बोर्ड लगा दिया।

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आते रहे हैं कुत्तों से जुड़े मामले

लखनऊ में पालतू कुत्तों से जुड़े मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। लिफ्ट में कुत्ता लेकर चलने की वजह से छिटपुट लड़कियां भी होती रही हैं। सोसाइटी के कैंपस में पालतू कुत्तों को मल-मूत्र कराने के विवाद भी कई दफा सामने आए हैं।

पिटबुल ने ले ली थी अपने मालिक की जान

पिछले साल जुलाई में लखनऊ में पिटबुल डॉग ने अपने मालिक की जान ले ली थी। कैसरबाग के बंगाली टोला में रहने वाली रिटायर्ड शिक्षिका सुशीला त्रिपाठी (82) को उनके घर में पल रहे पिटबुल डॉग ने नोंच खाया था जिससे उनकी मौत हो गई थी।

सुशीला त्रिपाठी परिवार के साथ कैसरबाग के बंगाली टोला में रहती थीं। वह नारी शिक्षा निकेतन में शिक्षिका के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। सुशीला और उनके परिवार ने घर में एक लेब्राडोर तो दूसरा खूंखार प्रजाति का पिटबुल डॉग पाल रखा है।  एक सुबह सुशीला छत पर दोनों श्वानों को टहला रही थीं। इस दौरान अचानक से पिटबुल ने सुशीला पर हमला कर पेट, सिर, चेहरा, पैर और हाथ में कई जगह नोंच लिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान सुशीला के घर में केवल नौकरानी ही थी। सुशीला की चीख सुनकर वह छत पर पहुंची तो उन्हें खून से लथपथ देख शोर मचाया। सूचना पर सुशीला का बेटा अमित भी आ गया। आनन-फानन उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

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