DAV और DBS कॉलेज में ABVP की करारी हार, पहली बार जीता आर्यन, बाकी कॉलेजों का परिणाम भी जानिए

Sanchar Now
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देहरादून: छात्रसंघ चुनाव में उत्तराखंड के सबसे बड़े डीएवी पीजी कॉलेज में आर्यन छात्र संगठन (Dav Pg College Aryan) ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 14 सालों का विजय रथ थाम लिया है। डीएवी के छात्रसंघ चुनाव के परिणाम ने प्रदेश सरकार को भी झटका दिया है क्योंकि माना जाता है कि डीएवी पीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने का मतलब समानांतर सरकार चलाना जैसा होता है। डीएवी पीजी कॉलेज छात्र राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा कहा जाता है।

डीएवी पीजी कॉलेज में एबीवीपी का विजय रथ रोकने वाले आर्यन संगठन को भी एक छात्र नेता ने ही खड़ा किया था। महासचिव पद पर लगातार जगह बनाते हुए यह संगठन आज अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने में सफल हो गया है। डीएवी के बाद दूसरे नंबर पर देहरादून के डीबीएस पीजी कॉलेज में भी एबीवीपी को करारी हार मिली है।

यहां पर भी अध्यक्ष और महासचिव पद पर आर्यन संगठन का ही कब्जा हुआ है। उत्तराखंड के 120 महाविद्यालयों और कॉलेजों में हुए छात्र संघ चुनाव में अधिकांश पर एबीवीपी का कब्जा है लेकिन इन सब में सबसे महत्वपूर्ण डीएवीपी पीजी कॉलेज का छात्रसंघ चुनाव होता है। डीएवी पीजी कॉलेज में पिछले 14 सालों से अध्यक्ष पद पर एबीवीपी का कब्जा रहा है लेकिन इस बार आर्यन संगठन ने अपनी जगह बना कर सरकार को भी करारा झटका दिया है।

भाजपा का आनुषंगिक संगठन होने के कारण एबीवीपी को अध्यक्ष पद पर चुनाव के लिए मंत्रियों और विधायकों का पूरा सपोर्ट मिलता है। प्रदेश भर के साथ ही डीएवी में अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के लिए सरकार पूरी ताकत झोंक देती है।

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डीएवी की टूटी दीवार ने बांधा सिद्धार्थ के सिर पर जीत का सेहरा
डीएवी में 20 अक्टूबर को दीवार टूटने से हुई एक छात्रा की मौत ने कॉलेज प्रशासन और सरकार के रवैये को लेकर छात्रों में रोष भर दिया था। छात्र नेता सिद्धार्थ अग्रवाल इस दौरान आंदोलन पर उतर आए थे। सिद्धार्थ के इसी आंदोलन ने आज उनके सिर पर अध्यक्ष का ताज सजा दिया है। तत्कालीन प्राचार्य डा. केआर जैन और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ सिद्धार्थ अग्रवाल ने आंदोलन शुरू किया तो पूरे जौनसार के छात्र उनके पीछे आ गये।

21 अक्टूबर को सिद्धार्थ अग्रवाल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मोबाइल टावर पर चढ़ गए थे। दिन रात चले आंदोलन ने कॉलेज मैनेजमेंट को भी झुका दिया था। छात्र आंदोलन में मिली सफलता ने जौनसार के वोट को भी सिद्धार्थ के समर्थन में कर दिया। इससे पहले भी एनएसयूआई में रहते हुए सिद्धार्थ अग्रवाल ने सीयूईटी के फर्जी स्कोर बोर्ड से दाखिलों का पर्दाफाश किया था। इस मामले की जांच हुई तो कॉलेज में 26 से ज्यादा तरह के फर्जी दाखिलों का खुलासा हुआ था।

सिद्धार्थ अग्रवाल ने एक साल पहले एनएसयूआई से अध्यक्ष पद की तैयारी शुरू कर दी थी लेकिन चुनाव में अध्यक्ष पद पर किसी और छात्र को मौका देने की भनक पड़ी तो सिद्धार्थ ने 31 अक्टूबर को आर्यन संगठन का दामन थाम लिया। दूसरे ही दिन उन्होंने नामांकन किया और अब उनके सिर पर अध्यक्ष का ताज सज गया है।

संगठन के संस्थापक राकेश नेगी का कहना है कि 2005 में उन्होंने यह संगठन खड़ा किया था। तब वह खुद महासचिव का चुनाव लड़े थे और जीत दर्ज की थी। राकेश नेगी ने बताया कि 14 सालों में उनका संगठन केवल तीन चुनाव हारा है, जबकि अध्यक्ष पद पर पहली बार प्रत्याशी उतारा और दमदार जीत मिली।

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नेगी का कहना है कि इस जीत से पूरे संगठन से जुड़े छात्र बेहद उत्साहित हैं। संगठन से जुड़े छात्रों में चुनाव की तैयारी तो पहले से ही चल रही थी। अध्यक्ष पद पर जीते सिद्धार्थ अग्रवाल भी उनसे संपर्क में थे। उनकी लगन और छात्र हित के प्रति भावनाओं को देखते हुए संगठन ने उन पर दांव खेला और जीत उनके हिस्से में आई।

नेगी ने बताया कि इस चुनाव को लेकर कई पहलुओं पर भी मंथन लंबे समय से चल रहा था। अन्य छात्र संगठनों से भी वार्ता हुई जिस पर समीकरण बैठाने पर यही बात सामने आई कि महासचिव पद पर भी चुनाव लड़ते हुए आर्यन संगठन एबीवीपी के अध्यक्ष के समकक्ष ही आता है तो क्यों ना अध्यक्ष पद पर ही अपना प्रत्याशी उतारा जाए। नेगी का कहना है कि संगठन पूरी तरह से छात्र हित में काम करेगा और आगे भी छात्रों के विश्वास को बनाए रखेगा।

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