69 हजार शिक्षकों का मामला: हाई कोर्ट के आदेश के बाद कर्ज वसूली का फरमान, बैकफुट पर आई बैंक

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69000 शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार को बड़ा झटका देते हुए फिर से मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद सहायक शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है. शिक्षकों को नौकरी जाने का डर सताने लगा है. वहीं कोऑपरेटिव बैंक के एक लेटर ने भी शिक्षकों की टेंशन बढ़ा दी थी, लेकिन बैंक ने यूटर्न लेते हुए फैसले को वापस ले लिया है. जिसके बाद शिक्षक राहत महसूस कर रहे हैं. बैंक ने शिक्षकों से लोन रिकवरी के फैसले को वापस ले लिया है.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बैंकों ने शिक्षकों से लोन रिकवरी को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया था. वहीं अब कोऑपरेटिव बैंक के सचिव ने पत्र लिखकर नए आदेश जारी किए हैं. लेटर में कहा गया है कि पहले जारी किए गए लेटर को निरस्त कर दिया गया है. अत: उसे आमान्य समझा जाए.

बैंक ने लिया यूटर्न, बदला फैसला

बांदा कोऑपरेटिव बैंक के सचिव के लेटर में लिखा गया है कि जो पहले लोन रिकवरी के मामले में पत्र जारी किया गया था वो अब निरस्त कर दिया गया है. यानि लोन रिकवरी के लिए शिक्षकों पर दवाब नहीं बनाया जाएगा. बांदा में बैंक ने लोन रिकवरी के लिए निर्देश जारी किया था. कोऑपरेटिव बैंक ने बड़ी संख्या में सहायक शिक्षकों को लोन दिया है, जिसके बाद रिकवरी का दवाब बनाने के लिए बैंक के सचिव द्वारा पत्र जारी किया गया था.

लोन रिकवरी के लिए दवाब बनाने के दिए थे निर्देश

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कोऑपरेटिव बैंक के सचिव के पत्र के बाद शिक्षकों को राहत मिली है. बैंक के सचिव ने पहले जारी पत्र में लिखा था कि शिक्षकों से लोन वसूली करने और जब तक मामला साफ न हो जाए, तब तक कोई आर्थिक भुगतान न करने का निर्देश दिया था. हालांकि की हाई कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में नौकरी को लेकर डर है. दोबारा मेरिट जारी होने से कई शिक्षकों की नौकरी जाने का खतरा है.

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