योगी सरकार ने आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग में दो पीसीएस अधिकारियों की तैनाती की है। कन्नौज के एसडीएम अविनाश गौतम और रायबरेली के एसडीएम अभिषेक वर्मा को राज्य निर्वाचन आयोग में विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह तैनाती त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए की गई है।
अप्रैल-मई में संभावित पंचायत चुनाव, मतदाता सूची पर खास जोर
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव इसी वर्ष अप्रैल-मई के बीच कराए जाने की संभावना है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। पहले 6 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जानी थी, लेकिन समय सीमा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर हाल में शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची जारी की जाए।
12.69 करोड़ मतदाता, 41 लाख नए नाम जुड़े
ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 12.69 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए हैं। इसमें 41 लाख नए मतदाता शामिल हुए हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची की गहन जांच की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि न रहे और पंचायत चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराए जा सकें।
संजय प्रसाद समेत आठ आईएएस बने अपर मुख्य सचिव
इसी बीच योगी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा निर्णय लेते हुए वर्ष 1995 बैच के आईएएस और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद समेत आठ आईएएस अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव पद पर पदोन्नति दी है। इनमें से पांच आईएएस अधिकारी वर्तमान में उत्तर प्रदेश में तैनात हैं, जिनकी पदोन्नति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
केंद्र में तैनात अधिकारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति
इसके अलावा केंद्र सरकार में तैनात तीन आईएएस अधिकारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति दी गई है। इन अधिकारियों की पदोन्नति उस तिथि से प्रभावी मानी जाएगी, जिस दिन वे उत्तर प्रदेश में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इससे पहले वर्ष 1994 बैच के तीन आईएएस अधिकारियों को अपर प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति दी जा चुकी है।
रिक्तियों के आधार पर लिया गया निर्णय
रिक्त पदों की उपलब्धता को देखते हुए वर्ष 1995 बैच के आईएएस अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव नियुक्ति एम. देवराज ने सोमवार को औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक मजबूती और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

