लखनऊ: UP STF और साइबर क्राइम पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार को IIM रोड मड़ियांव से लोन घोटाले के मुख्य आरोपी आमिर एहसन को दबोचा. यह गिरफ्तारी गिरोह की कड़ियों को जोड़ने के बाद हुई है, जिसका खुलासा सितंबर 2025 में यूनियन बैंक के मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद हुआ था.
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि एसटीएफ अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है. अभियुक्तों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मोबाइल को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है. ठगी के करोड़ों रुपए जिन बैंक खातों और वॉलेट में भेजे गए, उनकी जानकारी खंगाली जा रही है.
कैसे हुआ करोड़ों का खेल: मास्टरमाइंड आमिर एहसन ने पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. गिरोह आम लोगों के आधार और पैन कार्ड हासिल करता था. इसके बाद उन दस्तावेजों पर लगे फोटो को एडिट करके गिरोह के सदस्यों की फोटो लगा दी जाती थी.
आरोपी फर्जी पते पर कंपनियां जैसे नेशन क्रिएशन बनाते थे और उनके नाम पर बैंक से मुद्रा लोन के लिए कोटेशन देते थे. गिरोह ने विभिन्न बैंकों के मैनेजरों से सांठगांठ कर रखी थी. बैंक कर्मचारी जानते हुए भी फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाते और लोन पास कर देते थे.
पीड़ित की शिकायत से खुला राज: इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब राज बहादुर गुरुंग नाम के व्यक्ति को लोन की जरूरत पड़ी. उसे झांसे में लेकर यूनियन बैंक की जानकीपुरम शाखा के तत्कालीन मैनेजर गौरव सिंह और नावेद हसन ने कई कागजों पर साइन करा लिए.
बाद में बताया गया कि लोन नहीं हुआ, लेकिन 6 महीने बाद राज बहादुर के फोन पर ईएमआई कटने का मैसेज आया. सिविल स्कोर चेक करने पर पता चला कि उसके नाम पर दो बड़े लोन फर्जी तरीके से निकाल लिए गए हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर की ठगी का जाल: मास्टरमाइंड आमिर एहसन ने 2017 में यूनिटी कॉलेज से ड्राफ्ट्समैन का डिप्लोमा किया था. 2018 में वह नावेद के संपर्क में आया, जो पहले से ही बैंक फ्रॉड में माहिर था.
गिरोह अब तक 100 से अधिक लोगों और फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का फर्जी लोन ले चुका है. गिरोह के सदस्य बिचौलियों को 10 प्रतिशत तक का कमीशन देते थे, ताकि बैंक अधिकारियों से संपर्क बना रहे.

