देहरादून में कांग्रेस ने वीरेंद्र पोखरियाल को बनाया मेयर प्रत्याशी, छात्र नेता से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

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देहरादून में कांग्रेस ने जहां छात्र राजनीति से संगठन में आए वीरेन्द्र पोखरियाल को मेयर का टिकट दिया है तो भाजपा ने भी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे सौरभ थपलियाल को मेयर का टिकट देकर मुकाबले को रोचक बना दिया।

सौरभ थपलियाल मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बाद भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष बने थे। इससे पहले वह डीएवी पीजी कॉलेज में अभाविप की छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और इसके बाद भाजयुमो में सक्रिय हुए।

सौरभ की राह शीर्ष नेताओं से संपर्क ने की आसान

भाजपा प्रदेश संगठन ने सभी कयासों को दरकिनार करते हुए युवा चेहरे सौरभ थपलियाल को देहरादून मेयर का टिकट दिया है। सौरभ को प्रत्याशी बनाने में शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधे संपर्क ने उनकी राह आसान बनाई। केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनकी नजदीकी ने सौरभ को मजबूत दावेदार के रूप में शुरू से ही रखा था। धर्मेन्द्र प्रधान उत्तराखंड में विभिन्न अवसरों पर प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे। उस दौरान सौरभ उनके काफी निकट रहे।

पर्वतीय क्षेत्र का होने के नाते भी उनकी दावेदारी अंतिम समय तक पुख्ता बनी रही। मोहकमपुर के चाणक्यपुरम में रहने वाले सौरभ थपलियाल पार्टी के बेदाग छवि के युवा नेता हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति में प्रवेश करने वाले सौरभ डीएवी पीजी कालेज में छात्र संघ अध्यक्ष बने और भाजयुमो में विभिन्न पदों पर रहने के बाद पुष्कर सिंह धामी के बाद प्रदेश अध्यक्ष भी बने।

सौरभ ने मेयर के टिकट की दौड़ में कई दिग्गजों को पीछे छोड़ा। भाजपा की ओर से मेयर टिकट की दावेदारी को देहरादून महानगर के पास डेढ़ दर्जन से अधिक नाम आए थे। इनमें प्रमुख रूप से निर्वतमान मेयर सुनील उनियाल गामा, प्रदेश कोषाध्यक्ष पुनीत मित्तल, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, धीरेंद्र पंवार, वरिष्ठ नेता अनिल गोयल, मंडी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष कुलदीप बुटोला, राजकुमार पुरोहित, प्रकाश सुमन ध्यानी, रविन्द्र जुगराण आदि शामिल थे।

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प्रोफाइल

– पता- ज्वाल्पा एनक्लेव मोहकमपुर,

– शैक्षणिक योग्यता-बीएससी, एमए राजनीति विज्ञान

सांगठनिक सेवा-

– 1990-बाल स्वयंसेवक

– 1991-प्राथमिक संघ शिक्षा वर्ग

– 1996-मुख्य शिक्षक, आरएसएस मोहकमपुर शाखा

– 1995 पूर्णकालिक विस्तारक एबीवीपी

– 1998 विवि प्रमुख एबीवीपी

छात्र राजनीति-

– 1999 छात्र संघ महासचिव डीएवी दून

– 1999 छात्र महासंघ महासचिव गढ़वाल विवि

– 2000 छात्र संघ अध्यक्ष डीएवी दून

– 2000 गढ़वाल छात्र महासंघ अध्यक्ष

– 2001 उत्तराखंड छात्र महासंघ अध्यक्ष

भारतीय जनता युवा मोर्चा

– 2003 जिला महामंत्री

– 2007 प्रदेश उपाध्यक्ष, उत्तराखंड

– 2010 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य

– 2013 प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड

सबसे कम उम्र के प्रत्याशी

सौरभ थपलियाल सोमवार को 11 बजे नामांकन जुलूस के बाद नगर निगम कार्यालय में अपना नामांकन कराएंगे। जिसमें पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी, मेयर टिकट के अन्य दावेदार भी मौजूद रहेंगे। सौरभ थपलियाल दून में मेयर पद के भाजपा के अब तक के सबसे कम उम्र के प्रत्याशी भी हैं। सौरभ ने रविवार को ही नामांकन पत्र खरीदा था, उसके बाद मेयर प्रत्याशी की दौड़ में वह तेजी से ऊपर बढ़े थे।

कांग्रेस ने वीरेंद्र पर जताया भरोसा

दून में राज्य आंदोलन के दौर में चर्चित युवा चेहरा रहे वीरेंद्र पोखरियाल पर कांग्रेस ने भरोसा जताया है। कांग्रेस ने उन्हें मेयर प्रत्याशी बनाया है। टिकट दावेदारी से लेकर घोषणा तक वीरेंद्र पोखरियाल संगठन और कार्यकर्ताओं की पहली पसंद रहे और हाईकमान ने भी चुनावी रण में उन पर भरोसा जताया है। वीरेंद्र पोखरियाल सक्रिय राजनीति में पहली बार सीधे किसी चुनाव में उतर रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश महामंत्री विरेंद्र पोखरियाल ने पिछले विधानसभा चुनाव में कैंट सीट से टिकट की दावेदारी की थी। वह दो दशक से कांग्रेस संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हैं। राज्य गठन के साथ वर्ष 2000 में उन्हें युवा कांग्रेस के गढ़वाल मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। वह 2007 में उत्तराखंड किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने। इस बार निकाय चुनाव में उन्हें गढ़वाल मंडल के निकाय चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

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राज्य आंदोलन में तीन बार गए जेल : वीरेंद्र को राज्य आंदोलन के दौरान पहली बार 1994 में पहली बार उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। तब पुलिस ने उन्हें बरेली जेल भेजा था। फिर 13 सितंबर 1994 को समाजवादी पार्टी के यूपी बंद के विरोध में वीरेंद्र पोखरियाल के नेतृत्व में हजारों छात्र दून की सड़कों पर उतर आए थे।

इस पर उन्हें गिरफ्तार कर मैनपुरी जेल भेज गया और छह दिन बाद रिहाई हुई। 16 दिसंबर 1994 को पुलिस कंट्रोल रूम में एसएसपी का घेराव करते वक्त उन्हें फिर से गिरफ्तार कर बरेली जेल भेजा गया और 36 दिन बरेली जेल में रहे। 1994 में ही उन्होंने उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर एक लाख युवाओं की देहरादून में हुई रैली का नेतृत्व किया था।

डीएवी कॉलेज से सीखा राजनीति का ककहरा

डीएवी पीजी कॉलेज की राजनीति से निकले वीरेंद्र पोखरियाल छात्र राजनीति में भी सक्रिय नाम रहे। वह 1993 से 1996 तक डीएवी कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष रहे। यहीं से उन्होंने राज्य आंदोलन के दौर में युवाओं की गोलबंदी की और पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस के लिए चुनौती बने रहे।

2004 से सहकारी बाजार के हैं अध्यक्ष

वर्ष 2004 से वीरेंद्र पोखरियाल सहकारी बाजार देहरादून के अध्यक्ष हैं। वह 2013 में उत्तराखंड राज्य आवास संघ लिमिटेड का निदेशक बने। वह इफको में डेलीगेट की भूमिका में भी हैं।

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