उत्तराखंड में मलिन बस्तियों पर मेहरबान धामी सरकार, फिर से लाएगी अध्यादेश

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चुनावी साल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार उत्तराखंड में बसी 582 अवैध और मलिन बस्तियों को लेकर एक बार फिर अध्यादेश लाने जा रही है। इसके लिए अध्यादेश का प्रारूप तैयार कर लिया है।

23 अक्तूबर को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में इसका प्रस्ताव आ सकता है। इससे पहले सरकार वर्ष 2018 और वर्ष 2021 में अध्यादेश लेकर आई थी, जिसकी अवधि सोमवार को समाप्त हो गई है।

वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाकर मलिन बस्तियों को तोड़ने के आदेश दिए थे। तब से लेकर आज तक मलिन बस्तियों का नियमितिकरण तो नहीं हो पाया, लेकिन इस मामले में राजनीति जारी है।

प्रदेश में एक बार फिर निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, ऐसे में सरकार इन बस्तियों में रहने वाले आठ लाख लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी। 36 प्रतिशत बस्तियां निकायों, 10 प्रतिशत राज्य, केंद्र सरकार, रेलवे और वन विभाग की भूमि पर काबिज हैं। बाकी 44 प्रतिशत बस्तियां निजी भूमि पर अतिक्रमण कर खड़ी हुई हैं।

देहरादून में ही 129 बस्तियां चिन्हित

राज्य बनने से पहले नगर पालिका रहते हुए देहरादून में 75 मलिन बस्तियां चिन्हित की गई थीं। राज्य गठन के बाद दून नगर निगम के दायरे में आ गया। वर्ष 2002 में मलिन बस्तियों की संख्या 102 चिन्हित हुई और वर्ष 2008-09 में हुए सर्वे में यह आंकड़ा 129 तक जा पहुंचा। वर्तमान में यह आंकड़ा 150 के पार पहुंच सकता है। यह केवल चिन्हित बस्तियों का रिकार्ड है, हकीकत में बस्तियों की संख्या पहले से कहीं अधिक बढ़ी हैं।

मलिन बस्तियां एक नजर में

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-वर्ष 2016 में प्रदेश के 63 नगर निकायों में हुए सर्वे में 582 मलिन बस्तियां पाई गई। जिनकी कुल जनसंख्या सात लाख 71 हजार 585 थी, जबकि इनमें मकानों की संख्या एक लाख 53 हजार 174 सामने आई थी।

-582 में से 278 बस्तियां नगर निकाय की ओर से नोटिफाइड हैं और 62 की सूचना ही उपलब्ध नहीं है।

-37 प्रतिशत बस्तियां नदी और नालों के किनारे बसी हुई हैं।

– 44 प्रतिशत बस्तियां निजी भूमि पर और 36 प्रतिशत नगर निकाय की भूमि पर बसी हैं।

– 10 प्रतिशत बस्तियां राज्य सरकार, केंद्र सरकार, रेलवे और वन विभाग की भूमि पर बसी हैं।

– बस्तियों में 55 प्रतिशत मकान पक्के, 29 प्रतिशत आधे पक्के व 16 प्रतिशत कच्चे मकान हैं।

मलिन बस्तियों के नियमितीकरण का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है, लेकिन इसमें समय लग रहा है। बस्तियों का नए सिरे से सर्वे भी होना है। सीएम के निर्देश पर फिलहाल यथास्थिति रखने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। यथास्थिति रखने के क्रम में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।

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