लखनऊ। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने कंप्लायंस रिडक्शन एंड डीरेगुलेशन फेज-दो से जुड़े सुधारों को लागू करने हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति अनुपालन में कमी और विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी।
एक सप्ताह में रिपोर्ट, दो माह में क्रियान्वयन
समिति को अपने गठन के एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा आगामी दो महीनों में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी, जिससे सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
समिति की संरचना और जिम्मेदारियां
प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी. गुरुप्रसाद द्वारा सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही लखनऊ, गाजियाबाद और वाराणसी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को समिति का सदस्य बनाया गया है। निदेशक, आवास बंधु को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को समिति का सदस्य संयोजक नियुक्त किया गया है, जो समन्वय और कार्य संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे।
केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप सुधार
भारत सरकार द्वारा विभिन्न विभागों को कंप्लायंस रिडक्शन एंड डीरेगुलेशन फेज-दो के तहत भूमि, भवन, विनिर्माण, ऊर्जा, श्रम, अग्निशमन, पर्यावरण, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है।
पहले चरण में यूपी की उपलब्धि
कंप्लायंस रिडक्शन एंड डीरेगुलेशन के पहले चरण में शामिल 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की भारत सरकार द्वारा की गई रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ने पहला स्थान हासिल किया था। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार ने फेज-दो के क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

