5 करोड़ की विदेशी घड़ियां, 4 लग्जरी गाड़ियां और मंत्रालय में VIP एंट्री… फर्जी डिप्लोमैट हर्षवर्धन जैन ने ढाई घंटे में उगले ये राज

Sanchar Now
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गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में यूपी STF ने फर्जी दूतावास चलाने वाले हर्षवर्धन जैन को गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से VIP नंबर वाली लग्जरी 4 गाड़ियां , अलग-अलग देशों और कंपनियों की 34 मोहरें , विदेश मंत्रालय की फर्जी दस्तावेज और 44.70 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. हर्ष वर्धन को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. हर्षवर्धन कविनगर में किराए के मकान में फर्जी दूतावास चला रहा था. आरोपी खुद को वेस्ट आर्कटिक, सबोरगा, पुलावाविया, लोडोनिया देशों का एंबेसडर बताता था. मजेदार बात यह है ये सभी नकली है यानी इन नामों के कोई देश ही नहीं हैं. कविनगर गाजियाबाद का पॉश इलाका है.

हर्षवर्धन जैन का आलीशान सफेद रंग का मकान है. मकान को देखकर लगता ही नहीं ये मकान है. आलीशान दफ्तर या दूतावास जैसा ही लगता है. आरोपी ने इस घर के बाहर अलग अलग देशों के झंडे लगाकर, बाहर नीले रंग की एम्बेसी की नंबर प्लेट लगी हुई मर्सिटीज गाड़ियां खड़ी कर रखी थीं. इतना ही नहीं, लोगों को झांसे में लेने के लिए आरोपी खुद की मॉर्फ फोटो प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य बड़े लोगो के साथ लगाकर रखता था. कंपनियों और प्राइवेट लोगों को विदेश में काम दिलाने के नाम पर दलाली लेता था. शेल कंपनियों के जरिये हवाला रैकेट भी चलाता था.

आरोपी हर्षबर्धन जैन को लेकर एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 2011 में इसके पास से सेटेलाइट फोन बरामद हुआ था. तब कवि नगर में इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था. हर्षवर्धन के पहले इंटरनेशनल आर्म्स डीलर चंद्रास्वामी और अदनान खगौशी से संपर्क थे. आरोपी के पास से डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट की 4 गाड़ियां, माइक्रोनेशन देशों के 12 डिप्लोमेटिक पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय की मुहर लगे दस्तावेज, कई देश और कंपनियों की मुहरें, प्रेस कार्ड, 44 लाख कैश, विदेशी मुद्रा, 18 डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट बरामद हुई हैं. हर्षवर्धन से यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट और गाजियाबाद के कवि नगर थाने की टीम पूछताछ कर रही है.

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2011 में साउथ अफ्रीका में कारोबार करता था हर्षबर्धन

STF SSP सुशील घुले ने बताया कि छापेमारी से पहले केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से विदेश मंत्रालय को फर्जी दूतावास संचालित होने की सूचना भेजी थी. मंत्रालयों से जांच के बाद कार्रवाई की गई. STF के मुताबिकआरोपी 2011 में साउथ अफ्रीका में कारोबार करता था. वहां से एयरपोर्ट सुरक्षा अधिकारियों को जानकारी दिए बिना सैटेलाइट फोन लेकर आया था. जैसे ही फोन ऑन किया केंद्रीय एजेंसी ने पता चल गया. फिर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई. गहन पूछताछ में किसी प्रकार की देशविरोधी गतिविधि न मिलने पर छोड़ दिया गया.

मकान के बाहर लगी थी अनूप सिंह नाम की प्लेट

कविनगर में पुलिस कमिश्नर, डीएम समेत कई अफसरों के ऑफिस हैं. फर्जी दूतावास के बाहर आलीशान मकान में अनूप सिंह नाम के व्यक्ति की नेम प्लेट लगी है. इसी मकान से करीब 100 मीटर आरोपी हर्षवर्धन का आना-जाना था. यह मकान हर्षवर्धन के पिता का बताया जाता है.

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