दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा का निधन, नक्सलियों के साथ संबंध मामले में किया था गिरफ्तार

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा का शनिवार को निधन हो गया. उन्होंने हैदराबाद के अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली. पैंक्रियाज में पथरी की शिकायत के बाद उनकी सर्जरी हुई थी. वे पोस्ट-ऑपरेटिव की परेशानियों से भी जूझ रहे थे. उनका ईलाज निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हैदराबाद में चल रहा था. करीब 10 दिन पहले ही उन्हें इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शनिवार रात करीब आठ बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा और साढ़े 8 बजे के करीब डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बता दें कि जीएन साईबाबा दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर थे. उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां कानून (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था. उनपर माओवादी संगठनों से संबंध रखने का आरोप लगा था.

UAPA और भारतीय दंड संहिता के तहत ठहराया था दोषी

महाराष्ट्र की गढ़चिरौली कोर्ट ने 2017 में जीएन साईबाबा को UAPA और भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी ठहराया था. जिसके बाद जीएन साईबाबा बॉम्बे हाईकोर्ट में गढ़चिरौली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. 14 अक्टूबर 2022 को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने जीएम साईबाबा को रिहा कर दिया था.इसके बाद 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बेला त्रिवेदी की विशेष बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को बदल दिया था. कोर्ट का मानना था कि जीएन साईबाबा और अन्य आरोपी राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ गंभीर अपराध के दोषी हैं.

इसी साल हुई थी रिहाई

इसी साल बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक बार फिर जीएन साईबाबा को रिहा कर दिया था. इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेट से कम्यूनिस्ट या नक्सल साहित्य डाउनलोड करना और किसी विचारधारा का समर्थक होना UAPA अपराध की श्रेणी में नहीं आता, जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने जीएन साईबाबा की रिहाई के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था.

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