Noida Crime: एप और पोर्टर से गांजा सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस ने सरगना समेत तीन को दबोचा

Sanchar Now
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नोएडा: नोएडा सेक्टर-113 थाना पुलिस ने ऑनलाइन ऐप्स के जरिए दिल्ली-एनसीआर में गांजा सप्लाई करने वाले एक सक्रिय गैंग का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने गैंग के सरगना समेत तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से 10 किलो गांजा बरामद किया गया है. पकड़े गए आरोपी नोएडा में कॉलेज कॉर्पोरेट ऑफिस के आसपास गांजे की ऑनलाइन डिलवरी कर रहे थे. गैंग का मुख्य सरगना योगेंद्र प्रताप सिंह है जो कि अपने दो अन्य साथी सूरज शिवकेश के साथ मिलकर नोएडा में अवैध गांजे का ऑनलाइन कारोबार कर कर रहा था.

डीसीपी नोएडा यमुना प्रसाद ने बताया कि तस्करों की पहचान कन्नौज निवासी योगेंद्र प्रताप सिंह, बिहार के नालंदा निवासी सूरज उर्फ रुद्र और हरदोई निवासी शिवकेश के रूप में हुई है. तीनों वर्तमान में शहर के अलग-अलग हिस्से में किराये का कमरा लेकर काम कर रह रहे हैं. योगेंद्र गिरोह का सरगना है. आरोपियों के पास से जो गांजा बरामद हुआ है वह ओजी, मैंगो और शिलांग किस्म का है. इसकी गुणवत्ता उच्च किस्म की होती है. कीमत भी आम गांजे से पांच गुना ज्यादा होती है. सरगना पूर्व में एनडीपीएस ऐक्ट की धारा में ही जेल जा चुका है.

ऐसे करते थे गांजा की सप्लाई:

एडिशनल डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन ऐप के माध्यम से क्लाइंट से उसकी लोकेशन और ऑर्डर प्राप्त करते थे. इसके एवज में ऑनलाइन भुगतान ग्राहक से करा लिया जाता था. सरगना ऑनलाइन ऐप का इस्तेमाल कर गांजे को पैक कर निर्धारित लोकेशन पर उपलब्ध करवाता था. सरगना यह पहले ही सुनिश्चित कर लेता था कि गांजे की डिलिवरी के दौरान यदि कोई पकड़ा जाए तो वह राइडर ही हो, न कि उसके गिरोह का सदस्य. निर्धारित स्थान पर गांजा राइडर के माध्यम से ही पहुंचता था. राइडर को यह नहीं पता होता था कि जिस उत्पाद की वह डिलिवरी करने जा रहा है उसके अंदर गांजा है. सरगना पूरे दिल्ली-एनसीआर में गांजे की आपूर्ति करवाता था. गांजे की पैकिंग के लिए आरोपी नामी कंपनियों की कवर पैकिंग पॉलीथीन का इस्तेमाल करते थे. किसी को शक न हो इसके लिए गिरोह के सदस्य पैकिंग के ऊपर फर्जी ऑर्डर की रसीद भी लगा देते थे.

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ऐसे शुरु किया गांजे की तस्करी:

गिरोह का सरगना योगेंद्र सिंह पहले नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करता था. कंपनी में कई लोग ऐसे थे, जो नियमित गांजे का सेवन करते थे. योगेंद्र को लगा वह कंपनी के लोगों को ही गांजा बेचकर मुनाफा कमा सकता है. इसके लिए उसने दिल्ली के एक गांजा तस्कर से संपर्क किया. वह दिल्ली से गांजा लाकर कंपनी के लोगों को बेचने लगा. जब उसे लगा इसमें काफी मुनाफा है तो उसने बाहर के लोगों को भी गांजा बेचना शुरु किया. कुछ समय बाद उसने कंपनी की नौकरी भी छोड़ दी और गांजे की तस्करी पर ही ध्यान केंद्रित कर लिया. इसके बाद उसने सूरज और शिवकेश समेत अन्य युवकों से संपर्क किया और गांजे की तस्करी का दायरा काफी बढ़ा लिया. कुछ साल पहले से योगेंद्र सूरज और शिवकेश समेत अन्य से गांजे की तस्करी कराता था, जो मुनाफा होता था उसका तीस प्रतिशत योगेंद्र लेता था.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के सदस्यों को गांजे की आपूर्ति करने वाली चेन पर भी नजर है. लिंक खंगाल लिया गया है. इस मामले में जल्द ही कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. कुछ छात्र भी गिरोह के सदस्यों के ग्राहक थे. योगेंद्र के खिलाफ फेज तीन और सेक्टर-113 थाने में तीन केस एनडीपीएस ऐक्ट के तहत पहले से ही दर्ज हैं. उसके दोनों साथियों का आपराधिक इतिहास का पता किया जा रहा है.

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