शासन स्तर से हुई सुनवाई में ग्रेटर वैल्यू शरणम का एफएआर को मिली मंजूरी, एओए ने जताई थी आपत्ति

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नोएडा के सेक्टर-107 स्थित ग्रेट वैल्यू शरणम सोसायटी में 3 नए टावरों के निर्माण को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है. शासन स्तर से ग्रेट वैल्यू प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड को अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) खरीदने की मंजूरी मिल गई है. इस पर सोसायटी की एओए (अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन) ने कड़ा विरोध जताया है. एओए का कहना है कि मंजूरी प्रक्रिया में निवासियों की राय को दरकिनार किया गया है.

2023 में किया था आवेदन

सूत्रों के मुताबिक, बिल्डर ने वर्ष 2023 में तीन नए टावरों के लिए अतिरिक्त एफएआर खरीदने का प्रार्थना पत्र प्राधिकरण में दिया था, लेकिन सोसायटी के निवासियों की सहमति न मिलने के कारण यह आवेदन निरस्त कर दिया गया था. इसके बाद बिल्डर ने मामला शासन स्तर पर उठाया, जहां दिसंबर 2024 में एफएआर खरीदने की अनुमति दे दी गई.

हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

एओए अध्यक्ष अभिषेक मित्तल ने बताया कि इस मंजूरी के खिलाफ पहले भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. अदालत ने शासन को 60 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था. औद्योगिक विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस दौरान दो बार सुनवाई की. एओए का आरोप है कि 9 अक्टूबर को हुई अंतिम सुनवाई में उनकी बात सुनी ही नहीं गई और एफएआर को मंजूरी दे दी गई.

दोबारा जाएंगे कोर्ट

एओए का कहना है कि अब वह औद्योगिक विकास विभाग के आदेश के खिलाफ पुनः हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे. अध्यक्ष अभिषेक मित्तल ने कहा कि बिना निवासियों की सहमति के मंजूरी देना नियमों के विरुद्ध है. बिल्डर पर पहले से ही निर्माण शर्तों के उल्लंघन के आरोप हैं, फिर भी अतिरिक्त एफएआर को स्वीकृति दी गई है.

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शासन ने दी मंजूरी

वहीं, ग्रेट वैल्यू रियल्टी के प्रवक्ता ने कहा कि शासन ने सभी दस्तावेजों और नियमों की समीक्षा के बाद ही मंजूरी दी है. उनका कहना है कि अतिरिक्त एफएआर की मंजूरी पूर्णतः वैध है और अधिकांश फ्लैट मालिकों की सहमति से आवेदन किया गया था.

नए टावरों के निर्माण की तैयारी

एफएआर मंजूरी के बाद बिल्डर अब परियोजना के फेज-5 में तीन नए टावरों के निर्माण की तैयारी कर सकता है. हालांकि, एओए की आपत्ति के कारण मामला एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में जाने की संभावना बन गई है. इस विवाद ने एक बार फिर शहर में बिल्डर और निवासियों के बीच एफएआर विवादों को सामने ला दिया है.

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