बीजेपी एमएलए रामदुलार गोंड़ पर दर्ज दुष्कर्म के मामले में सुनवाई पूरी, अब इस दिन कोर्ट देगी फैसला

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नाबालिग से दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के मामले में दुद्धी विधायक रामदुलार गोंड़ को लेकर मंगलवार (आज) को आने वाला फैसला टल गया है। शाम तक फैसले के इंतजार में आरोपी पक्ष के साथ पीड़ित परिवार के लोग भी जमे रहे। साढ़े चार बजे के करीब जानकारी सामने आई कि फैसले की तिथि चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ाते हुए 20 नवंबर की तिथि तय की गई है। आरोपी खेमे में जहां इसको लेकर राहत की स्थिति दिखी। वहीं, पीड़ित पक्ष ने न्याय में देरी मिलने की बात कहते हुए आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष की तरफ से कोई न कोई कानूनी दांव-पेंच लगाकर मामले को लटका लिया जा रहा है। वहीं, मामले में सुलह करने के लिए तरह-तरह से दबाव-मानसिक उत्पीड़न का रास्ता अपनाया जा रहा है।

​​​​​​​यह है पूरा मामला

वर्ष 2014 में दुद्धी विधायक रामदुलारे गोंड़ के खिलाफ म्योरपुर थाने में नाबालिक से दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के तहज चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की थी। जिस समय एफआईआर दर्ज हुई, उस समय दुद्धी विधायक की पत्नी प्रधान थीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में रामदुलारे भाजपा के टिकट पर दुद्धी विधानसभा से विधायक निर्वाचित हो गए। इस बीच मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय/पाक्सो एक्ट की अदालत में चलती रही।

विधायक ने सुनवाई कर रही अदालत पर जताया है अविश्वास

अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत को एमपी-एमएलए से जुडे मामलों का क्षेत्राधिकार मिलने के बाद, पत्रावली, एडीजे प्रथम की अदालत में आ गई। अदालत की तरफ से 12 अक्टूबर को फैसले की तिथि तय की गई थी। ऐन वक्त पर विधायक की तरफ से सत्र न्यायाधीश के यहां, एडीजे प्रथम की अदालत पर अविश्वास जताते हुए, पत्रावली दूसरी अदालत में स्थानांतरण की मांग की गई। क्षेत्राधिकार से परे बताते हुए, सत्र न्यायाधीश ने पत्रावली स्थानांतरित करने का आवेदन खारिज कर दिया। वहीं, एडीजे प्रथम की अदालत की तरफ से मामले में 17 अक्टूबर फैसले की तिथि तय की गई। माना जा रहा है कि इस तिथि को फैसला आ सकता है। इसको देखते हुए जहां न्यायालय परिसर में खासी गहमागहमी थी। वहीं, पीड़ित पक्ष भी दोपहर से ही आकर न्यायालय परिसर में फैसले का इंतजार कर रहा था। शाम चार बजे के करीब विधायक रामदुलार अदालत में पेश भी हुए। जहां, कानूनी कारणों का हवाला देते हुए, फैसले के लिए नई तिथि 20 नवंबर तय कर दी गई।

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बार-बार तिथि टलने से न्याय मिलने में हो रही देरी: पीड़ित पक्ष

मौके पर मौजूद पीड़ित पक्ष (पीड़िता के भाई) का कहना था कि बार-बार तिथि टलने से न्याय में देरी हो रही है। कहा कि उसके उपर मामले में सुलह के लिए दबाव पड रहा है और आरोपी पक्ष कोई न कोई कानूनी दांव-पेंच अपनाकर तिथि को आगे बढ़वा ले रहा है। वहीं, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रामजियावन यादव का कहना था कि आरोपी पक्ष बार-बार कोई न कोई कानूनी दांव-पेंच अपनाकर तिथि टलवा ले रहा है। आज (मंगलवार को) पूरी उम्मीद थी कि फैसला आ जाएगा लेकिन ऐन वक्त पर पता चला कि तिथि 20 नवंबर तक के लिए टाल दी गई है।

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