संविधानिक अधिकारों की अनदेखी! नोएडा–ग्रेटर नोएडा में नगर निगम गठन की मांग तेज, देहात मौर्चा ने किया आंदोलन का ऐलान

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संचार नाउ। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में नगर निगम गठन की मांग को लेकर आवाज तेज होती जा रही है। इसी क्रम में राष्ट्रीय देहात मोर्चा द्वारा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमिक्रोन-1A में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का संचालन आरडब्ल्यूए अध्यक्ष चौधरी योगेंद्र मावी ने किया, जबकि अध्यक्षता डॉक्टर एमएन सांगवान ने की। गोष्ठी में बड़ी संख्या में आरडब्ल्यूए पदाधिकारी, सामाजिक संगठन और नागरिक मौजूद रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में नगर निगम गठन की मांग करते हुए इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया और आंदोलन को और तेज करने का आह्वान किया।

दरअसल, गोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय देहात मोर्चा के अध्यक्ष राव संजय भाटी ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे महानगरों में नगर निगम के चुनाव होते हैं, लेकिन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लाखों नागरिकों को संविधान प्रदत्त स्थानीय निकाय प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में गौतम बुद्ध नगर में नगर निगम गठन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन कुछ अधिकारियों की सलाह पर इसे पास नहीं किया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस विचार गोष्ठी में राव संजय भाटी ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण अधिकारियों द्वारा गलत जानकारी और गुमराह किए जाने के कारण ही नगर निगम का गठन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों प्राधिकरण के बोर्ड में स्थानीय कोटे से किसी भी सदस्य का चुनाव या मनोनयन नहीं किया जा रहा। विकास के नाम पर गांवों और सेक्टरों में रहने वाले नागरिकों से स्थानीय चुनाव और वोट के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं।

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इस अवसर पर एक्टिव सिटीजन के ठाकुर आलोक सिंह ने कहा कि अस्पताल, स्कूल और मार्केट जैसी आवश्यक सुविधाओं की भूमि को प्राधिकरण ऊंची कीमत पर नीलाम कर रहा है, जिससे नागरिकों के लिए बुनियादी सुविधाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्राधिकरण को मिलकर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाएं कम लागत पर उपलब्ध करानी चाहिए।

पंकज अवाना ने कहा कि गांव देहात और सेक्टरों के निवासियों को विकास के नाम पर छलने का काम हो रहा है। स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी, सीवर, यातायात और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। भाकियू शहीद भगत सिंह के अध्यक्ष नवीन भाटी ने कहा कि प्राधिकरण के रवैये से किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। वहीं चौधरी भीम सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के सीईओ गांवों और सेक्टरों की समस्याओं के समाधान के बजाय कार्यालय में आना ही बंद कर चुके हैं।

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