यूपी में अधिकारियों के सामने लेखपालों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, अखिलेश की टिप्पणी के बाद गरमाया अतिक्रमण का मामला

Sanchar Now
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उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में जिला प्रशासन ने दो दिन के अंदर ग्राम समाज की जमीन पर बने मकानों को बुलडोजर से गिरा दिया. कुल 25 मकान गिराए गए. यहां 50 साल से भी ज्यादा समय से ये परिवार रह रहे थे. बुलडोजर की कार्रवाई से लोगों में इतना रोष है कि जब सोमवार को ग्रामीणों ने दो लेखपालों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. इससे नाराज लेखपालों के संगठन ने मारपीट करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया.

साथ ही उनका ये भी आरोप था कि पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों ने ये सब किया. फिर भी पुलिस तमाशबीन खड़ी ये सब देखती रही. पुलिस ने इस पर एक्शन लिया है. घटना नवाबगंज थाना क्षेत्र के उखरा गांव में हुई. जानकारी के मुताबिक, शनिवार और रविवार को जिला प्रशासन की टीम ने बुलडोजर चलाकर सरकारी जमीन पर बने कई मकानों को ढहा दिया था. इसी बात से ग्रामीण नाराज हैं.

बीजेपी के कुछ नेता सोमवार को गांव पहुंचे. भाजपा नेता जब पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार और थाना प्रभारी बलराज भाटी के साथ लोगों से बात कर रहे थे, तभी कुछ ग्रामीण उग्र हो गए और मौके पर मौजूद लेखपाल रुद्र प्रताप सिंह और सौरभ पांडेय पर हमला कर दिया. इसमें दोनों लेखपाल घायल हो गए. दोनों के कपड़े और फाइलें तक लोगों ने फाड़ दीं. बाद में पुलिस ने किसी तरह भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को नियंत्रित किया.

इस घटना के विरोध में लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने नवाबगंज थाने में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अजीत द्विवेदी ने कहा- हमारे साथियों को बेरहमी से पीटकर जख्मी कर दिया गया और उनके अभिलेख छीन लिए गए. जब तक मारपीट के आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तक उनका धरना जारी रहेगा. पुलिस ने इस पर एक्शन लेते हुए 30 लोगों पर FIR दर्ज की है.

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ग्राम पंचायत की जमीन पर बने थे घर

ADM सुभाष चंद्र प्रजापति के मुताबिक, सभी मकान ग्राम पंचायत की जमीन पर बने थे. यह जमीन विद्युत निगम को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनाने के लिए दी गई है. ग्रामीणों ने पहले तहसीलदार, बाद में जिलाधिकारी की कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. वहां से फैसला पक्ष में नहीं आने पर हाईकोर्ट में भी अपील की गई. वहां से भी अपील खारिज होने के बाद कार्रवाई हुई है.

नोटिस भी दिया था गांव वालों को

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के लिए चयनित जमीन पर गांव वालों का कब्जा था. प्रशासन ने कहा- अवैध निर्माण हटाने के लिए सभी को नोटिस भी दिया था. नोटिस मिलने पर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया. ग्रामीण मुकदमा हार भी गए. बावजूद इसके वहां से नहीं हटे. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनाने के लिए डेढ़ एकड़ जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की है. जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, उसके दायरे में यह मकान भी आ गए. इसलिए प्रशासन ने इन मकानों को तोड़ा.

अखिलेश यादव ने की थी निंदा

जब मकानों पर बुलडोजर की कार्रवाई हुई तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसकी कड़ी निंदा की थी. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा था, ”ये है प्रतिशोध से भरी भाजपाई राजनीति का वीभत्स चेहरा. भाजपा बसे-बसाये घरों को गिराकर सुख पाती है. जिन्होंने अपने घर नहीं बसाये, पता नहीं वो दूसरों के घर गिराकर किस बात का बदला लेते हैं. हर गिरते घर के साथ भाजपा और भी नीचे गिर जाती है.”

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 17 सितंबर को अंतरिम आदेश पारित किया था. इसके मुताबिक, देश में बिना उसकी अनुमति के किसी भी संपत्ति को नहीं गिराया जाना चाहिए. हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह आदेश सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों, रेलवे लाइनों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के मामलों में लागू नहीं होगा.

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