प्रदेश सरकार ने निर्यात विकास प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। इस निर्णय से निर्यातकों को प्रचार, प्रसार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में सीधा लाभ मिलेगा। प्रचार, विज्ञापन, कैटलॉग और वेबसाइट से जुड़े खर्च पर मिलने वाली सहायता को 75 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति निर्यातक प्रति वर्ष कर दिया गया है।
विदेशी खरीदारों को नमूने भेजने पर बढ़ी सहायता
विदेशी खरीदारों को उत्पादों के नमूने भेजने में होने वाले खर्च पर भी सरकार ने सहायता राशि बढ़ाई है। पहले जहां इस मद में एक लाख रुपये की सहायता मिलती थी, अब इसे बढ़ाकर दो लाख रुपये प्रति निर्यातक प्रति वर्ष कर दिया गया है, जिससे नए बाजारों में उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा।
एमएसएमई निर्यातकों को मेलों में भागीदारी पर विशेष सहयोग
निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र के निर्यातकों को विदेशी मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेने पर स्टाल के वास्तविक व्यय का 75 प्रतिशत, अधिकतम 3.25 लाख रुपये तक दिया जाएगा। इसके साथ ही हवाई यात्रा पर भी 1.25 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
गुणवत्ता प्रमाणन पर मिलेगी 25 लाख रुपये तक की सहायता
गुणवत्ता नियंत्रण योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रमाणन के लिए भी सरकार ने बड़ा प्रावधान किया है। अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), वूलमार्क, हॉलमार्क, एचएसीसीपी और सीई मार्क जैसे प्रमाणनों पर होने वाले खर्च के लिए प्रति निर्यातक प्रति वर्ष 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
ट्रेड फेयर और बायर सेलर मीट को मिलेगा प्रोत्साहन
विदेश में आयोजित ट्रेड फेयर और बायर सेलर मीट की आयोजक संस्थाओं को कुल व्यय का 75 प्रतिशत, अधिकतम तीन करोड़ रुपये तक की सहायता देने का निर्णय लिया गया है। वहीं देश में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों के लिए आयोजक संस्था को कुल व्यय का 75 प्रतिशत, अधिकतम एक करोड़ रुपये तक सहायता मिलेगी। इसके अलावा वर्चुअल ट्रेड फेयर के आयोजन पर भी 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।


