क्या मिलीभगत से हो रही मनमानी? अधूरे एफओबी पर लाखों की विज्ञापन कमाई

Sanchar Now
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संचार नाउ। सूरजपुर-कासना मार्ग पर निर्माणाधीन फुट ओवरब्रिज (एफओबी) को लेकर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। नियमों के मुताबिक, किसी भी एफओबी का विज्ञापन कार्य तभी शुरू हो सकता है जब प्राधिकरण द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र (सीसी) जारी कर दिया जाए और औपचारिक उद्घाटन हो जाए। लेकिन यहां कार्यदायी कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर पहले ही विज्ञापन शुरू कर दिया है। यह मामला न सिर्फ नियमों की अनदेखी है, बल्कि सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा और प्रशासन की साख से जुड़ा है।

ग्रेटर नोएडा में अधूरे एफओबी, लाखों की कमाई

जिला न्यायालय, सेक्टर गामा-1 जगत फार्म मार्केट और सेक्टर अल्फा-1/कैलाश अस्पताल के सामने बनाए जा रहे तीन एफओबी पर अभी तक लिफ्ट लगना और अन्य सुरक्षा कार्य पूरे नहीं हुए हैं। इसके बावजूद, पिछले एक माह से इन निर्माणाधीन एफओबी पर बड़े-बड़े संस्थानों के विज्ञापन लगाकर हर माह लाखों रुपये की कमाई की जा रही है। खास बात यह है कि एफओबी के दोनों ओर विज्ञापन बोर्ड लगाए गए हैं, जबकि निर्माण कार्य अभी अधूरा है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की मिलीभगत या लापरवाही?

यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर बिना सीसी और उद्घाटन के विज्ञापन की अनुमति किसने दी। क्या यह सब प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है? या फिर कार्यदायी कंपनी खुद को प्राधिकरण से बड़ा समझते हुए मनमानी कर रही है?
नियम साफ कहते हैं कि कार्य पूर्ण होने और प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही विज्ञापन संभव है। लेकिन यहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।

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जगत फार्म का एफओबी: फरवरी से लटका उद्घाटन

जगत फार्म मार्केट के सामने बन रहा एफओबी फरवरी में चालू करने का दावा किया गया था। लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी यह चालू नहीं हुआ। यहां रोज़ाना हजारों छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग सड़क पार करते समय अपनी जान जोखिम में डालते हैं। ट्रैफिक का दबाव इतना अधिक है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम अभी तक पूरे नहीं किए गए।

क्या अब प्राधिकरण करेगा कार्यवाई ?

पूरे शहर में एफओबी निर्माण का ठेका केवल एक ही कंपनी को दिया गया है। बीओटी मॉडल के तहत यह कंपनी अगले 15–20 साल तक रखरखाव और संचालन करेगी। निर्माण पर खर्च की भरपाई विज्ञापन से होनी है, जिसमें प्राधिकरण को भी हिस्सा मिलता है। ऐसे में अब सवाल यह है कि प्राधिकरण कार्रवाई करेगा या फिर इस मनमानी पर आंख मूंदे रहेगा।

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