जानिए कौन है गैंगेस्टर अनुराग दुबे उर्फ डब्बन, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने UP पुलिस पर उठाए सवाल

Sanchar Now
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद निवासी गैंगस्टर अनुराग दुबे के मामले में पुलिस पर सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने यूपी पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको संवेदनशील होना चाहिए, ना कि सिर्फ शक्ति का आनंद लेना चाहिए. कोर्ट ने डीजीपी का नाम लेते हुए कहा कि अगर हमारे सामने याचिकाकर्ता (अनुराग दुबे) को छुआ गया तो कठोर आदेश पारित किया जाएगा, जो पूरी जिंदगी याद रहेगा. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर ये अनुराग दुबे है कौन, जिसके केस में यूपी पुलिस को ‘सुप्रीम’ फटकार मिली?

बता दें कि फर्रुखाबाद के गैंगस्टर अनुराग दुबे उर्फ डब्बन के खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और जालसाजी के कई मामले दर्ज हैं. उस पर एनएसए, गुंडा एक्ट के तहत भी केस दर्ज हैं. वहीं, अनुराग का भाई अनुपम दुबे जो कि बसपा नेता है उसके खिलाफ भी हत्या समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं.

आरोप है कि ये दोनों भाई गैंग चलाते हैं और क्षेत्र में दहशत फैलाते हैं. इलाके में इनकी खूब दादागिरी चलती है. एक अनुमान के मुताबिक, इन दोनों का 100 करोड़ रुपये से ऊपर का साम्राज्य है और इनकी गिनती बाहुबली माफियाओ में होती है. हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों भाई पुलिस के रडार पर हैं. उन पर ताबड़तोड़ एक्शन हो रहे हैं, जिसमें संपत्तियों की कुर्की भी शामिल है.

फिलहाल, अनुपम दुबे मथुरा जेल में निरुद्ध है. वहीं, उसका भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन कई महीनों से फरार चल रहा है. अलग-अलग जिलों में उस पर करीब 25 मुकदमे दर्ज हैं. इन्हीं में से दर्ज एक मुकदमे में पुलिस अनुराग की तलाश में जुटी हुई थी. जब उसका कहीं पता नहीं चला तो घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया. जिसपर अनुराग ने कोर्ट की शरण ली.

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अनुराग दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी. इसी याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को खूब खरी-खोटी सुनाई. कोर्ट ने जहां भूमि हड़पने के मामले में अनुराग को अग्रिम जमानत दी तो वहीं पुलिस की कार्यशैली पर बेहद सख्त टिप्पणी की.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

28 नवंबर को जब सुप्रीम कोर्ट में गैंगस्टर अनुराग दुबे की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई हो रही थी तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जवल भुयान की पीठ इस मामले को देख रही थी. पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं और उसे डर है कि अगर वह जांच के लिए कोर्ट में पेश हुआ तो उसके खिलाफ एक और नया मामला दर्ज किया जाएगा. यह देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारी की ओर से उसके मोबाइल फोन पर दिए गए किसी भी नोटिस का पालन करे. कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अदालत की पूर्व अनुमति के बिना उसे पुलिस हिरासत में नहीं लिया जाए.

इस मामले में आरोपी के वकील ने दावा किया कि अनुराग दुबे हर बार पूछताछ के लिए उपस्थित होते हैं, लेकिन यूपी पुलिस ने सिर्फ पत्र के जरिए समन भेजे. इस पर कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आज के जमाने में आप पत्र कैसे भेज रहे हैं? आरोपी को फोन करें और बताएं कि किस थाने में पेश होना है. इतने सारे पुलिस स्टेशन हैं कि आपको उसे यह भी बताना होगा कि इस बार ‘रेड कार्पेट’ कहां बिछाया है. आरोपी आज ही एसएचओ को फोन नंबर दें और फोन 24 घंटे चालू रहेगा. जांच अधिकारी आरोपी को मामले की जांच का समय, तारीख और स्थान बता सकता है. इसके अलावा आरोपी को नोटिस का जवाब देना होगा और जांच में शामिल होना होगा.

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नया मुकदमा ना दर्ज हो, ना गिरफ़्तारी हो

सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि किसी भी परिस्थिति में याचिकाकर्ता को उसके खिलाफ चल रहे मामलों या किसी नए मामले में अदालत की पूर्व अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाए. कोर्ट ने आरोपी अनुराग दुबे की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आदेश दिया कि पुलिस उसे नए मामलों में अदालत की अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं करेगी. साथ ही आरोपी को जांच में सहयोग करने और नोटिस का जवाब देने के लिए निर्देशित किया.

वहीं, पुलिस के लापरवाही और असंवेदनशील रवैए पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपके डीजीपी क्या कर रहे हैं? अगर आप रिपोर्ट दर्ज करेंगे तो हम ऐसा आदेश देंगे कि आपको याद रहेगा. आखिर एक आदमी पर कितने मुकदमे दर्ज करेंगे. जमीन खरीद का बिक्री अभिलेख है और आप जमीन हड़पने का दावा करते हैं. आपकी पुलिस किस खतरनाक क्षेत्र में प्रवेश कर रही है? आप पुलिस और सिविल कोर्ट की शक्ति को एक मान रहे हैं? बड़े आरोपों की जांच होनी चाहिए लेकिन  ऐसा भी नहीं है कि समाज में और कोई अपराधी नहीं हैं या गैंगस्टर नहीं हैं. सबकी जांच होनी चाहिए.

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