मिड डे मील के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर दस हजार की ले रहे थे रिश्वत, एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा

Sanchar Now
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उत्तर प्रदेश के बांदा में बेसिक शिक्षा विभाग के एक अफसर को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन की टीम ने गिरफ्तार किया है. सरकारी स्कूल के पीड़ित प्रिंसिपल ने बताया कि मिड डे मील (MDM) योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर ने उसे अपने स्कूल में रसोइयां की भर्ती करने के दौरान मानकों को दरकिनार कर फर्जी भर्ती करने का नोटिस दिया था. फिर इस नोटिस का जवाब देने पर 10 हजार रुपये की डिमांड की थी, न देने पर विभागीय कार्रवाई करने की धमकी दी थी. जिस पर उन्होंने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी. मामला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का है.

लेकिन अब बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया है कि उक्त आरोपी संविदा कर्मी था. लेकिन अब सवाल यह है कि यदि वो संविदा कर्मी था तो उसको इतने बड़े पद पर किसने और किसकी शह पर बिठाया. संविदा कर्मी और वो भी मिड डे मील का डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर? इस बीच स्थानीय लोगो ने बेसिक शिक्षा कार्यालय के अफसरों पर भी सवाल खड़े करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं.

फिलहाल, एंटी करप्श टीम ने बेसिक शिक्षा के कथित MDM के जिला कोऑर्डिनेटर को गिरफ्तार कर लिया है. पीड़ित का यह भी आरोप है कि आरोपी कोऑर्डिनेटर बच्चों को देने वाले मिड डे मील वाले भोजन में कमीशन खाता था, जबकि सरकार करोड़ो रूपये खर्च कर बेसिक शिक्षा के हालत बदलने में जुटी हुई है.

दरअसल, नरैनी विकास खंड क्षेत्र में तैनात सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल गंगा सागर ने अपने स्कूल में बच्चों के लिए खाना बनाने वाली रसोइयां की नियुक्ति की थी. गंगासागर के मुताबिक, उक्त आरोपी अफसर ने नौकरी में नियमों को दरकिनार करने का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर दिया. हालांकि, पीड़ित प्रिंसिपल नोटिस मिलने के कुछ दिन बाद रिटायर हो गए. तब से लेकर आरोपी उन्हें अपने कार्यालय में दौड़ा रहा था. इसी बीच उसने नोटिस के बदले रिश्वत की डिमांड कर दी.

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जिस पर पीड़ित प्रिंसिपल ने एंटी करप्शन ऑफिस में शिकायत की. टीम के गठन होने के बाद कथित मिड डे मील के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर भास्कर आसवानी को रंगे हाथ उसके ऑफिस से गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद टीम ने आरोपी को देहात कोतवाली ले जाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की.

पीड़ित प्रिंसिपल ने यह भी दावा किया कि पकड़ा गया आरोपी काफी समय से मिड डे मील का पैसा खा रहा है और इसमें विभाग के अन्य कर्मचारी/अधिकारी शामिल है. वहीं, मामले में एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर राकेश सिंह ने बताया कि रिटायर्ड सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल गंगासागर द्वारा शिकायत की गई थी कि रसोइयां के नियुक्ति फर्जी तरीके से करने के आरोप में नोटिस देने के बाद उसे डिस्पोजल करने के एवज में पैसे की डिमांड की गई. जिस पर हमारे उच्च अधिकारियों ने टीम का गठन किया और आरोपी को उसके ऑफिस से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल, आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

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