ग्रेनो में एसटीपी से ट्रीटेड वाटर को और स्वच्छ बनाने की तैयारी

Sanchar Now
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संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित पानी को और अधिक स्वच्छ बनाने की प्राधिकरण तैयारी कर रहा है। सभी एसटीपी को तकनीकी रूप से और अपग्रेड किया जाएगा। एसटीपी पर एक अतिरिक्त फिल्टर लगाकर ट्रीटेड वाटर को स्वच्छ जल के पैरामीटर के अनुरूप बनाया जाएगा। नोएडा के सेक्टर-54 स्थित एसटीपी पर इस तकनीक का पहले से ही इस्तेमाल हो रहा है।

दरअसल, ग्रेटर नोएडा में फिलहाल चार एसटीपी बने हुए हैं। इनमें बादलपुर स्थित एसटीपी की क्षमता 2 एमएलडी, कासना स्थित एसटीपी की क्षमता 137 एमएलडी, ईकोटेक-2 स्थित एसटीपी की क्षमता 15 एमएलडी और ईकोटेक-3 स्थित एसटीपी की क्षमता 20 एमएलडी है। एनजीटी ने एसटीपी से शोधित पानी को और स्वच्छ बनाने के निर्देश दिए हैं। मौजूदा समय में एसटीपी से शोधित पानी में फीकल की मात्रा 230 मिलीग्राम प्रति लीटर के आसपास है। एनजीटी ने इसे और बेहतर करते हुए 100 से भी कम करने को कहा है। इसमें टीडीएस व बीओडी-सीओडी की मात्रा भी इतनी कम हो जाएगी, जितनी कि पेयजल की होती है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने एनजीटी के आदेश के क्रम में सीवर विभाग को यह तकनीक शीघ्र अपनाने के निर्देश दिए हैं। सीवर विभाग आईआईटी दिल्ली से इसकी डीपीआर बनवा रहा है। इस तकनीक के अंतर्गत एसटीपी पर एक अतिरिक्त फिल्टर लगाया जाएगा, जिससे पानी में फीकल की मात्रा 100 मिलीग्राम प्रति लीटर के आसपास हो जाएगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक विनोद शर्मा ने बताया कि इसकी डीपीआर आईआईटी दिल्ली तैयार कर रहा है।

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प्राथमिक जानकारी के अनुसार 20 लाख रुपये प्रति एमएलडी लागत आने का अनुमान है। तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद ये एसटीपी ट्रेसरी ट्रीटमेंट प्लांट हो जाएंगे। यानी एसटीपी पर त्रिस्तरीय शोधन प्रणाली लागू हो जाएगी। इससे शोधित पानी का इस्तेमाल औद्योगिक उत्पादनों के लिए भी किया जा सकेगा। साथ ही जल प्रदूषण को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि डीपीआर अगले सप्ताह मिल जाने की उम्मीद है। इसके आधार पर सीनियर अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एसीईओ प्रेरणा सिंह ने कहा कि सभी एसटीपी को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की तैयारी है। आईआईटी दिल्ली से डीपीआर बनवाई जा रही है। प्राधिकरण की कोशिश है कि ट्रीटेड वाटर को स्वच्छ बनाया जा सके। इस पानी का इस्तेमाल औद्योगिक उत्पादनों के लिए भी किया जा सकेगा।

एसटीपी क्षमता
बादलपुर –2 एमएलडी
कासना –137 एमएलडी
ईकोटेक-2 –15 एमएलडी
ईकोटेक-3 –20 एमएलडी

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