सोसाइटी में लूंगी व नाइटी न पहनने वाले फरमान पर आरडब्ल्यूए ने लगाई रोक, कहां ड्रेस कोड के लिए किसी को नहीं किया बाध्य

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संचार न्यूज़। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित एक सोसाइटी की आरडब्ल्यूए ने सोसाइटी में घूमते समय लूंगी व नाइटी नहीं पहनने की अपील की थी जिसके बाद आरडब्लूए का यह लेटर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और लोगों ने इसे फरमान कहते हुए सोशल मीडिया पर जमकर विरोध किया। विरोध के बाद आरडब्लूए ने अब एक नोटिस जारी कर कहा कि यह फरमान नहीं अनुरोध था जिसके लिए किसी भी सोसाइटी वासी को बाध्य नहीं किया जा सकता।

दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित हिम सागर अपार्टमेंट सोसायटी के सचिव ने एक लेटर जारी किया था जिसमें उन्होंने सभी कोऑपरेटिव सोसायटी के सदस्यों से अपेक्षा जाहिर करते हुए कहा कि जब कभी आप सोसाइटी में किसी भी समय घूमने निकले आप अपने आचरण और पहनावे पर विशेष ध्यान रखें। आप अपने व्यवहार से किसी को आपत्ति का मौका ना दें आपके बालक/बालिकाएं भी आपसे सीखते हैं अतः सभी से अनुरोध है कि लूंगी व नाइटी चौकी घर का पहनावा है उसे पहनकर सोसाइटी में ने घूमे। इसके लिए सभी सोसाइटी वालों से सहयोग की अपील की लेकिन यह लेटर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और इसे आरडब्ल्यूए का फरमान कहते हुए कार्यवाही की मांग की गई।

हिमसागर अपार्टमेंट में ड्रेस कोड को लेकर जारी किए गए लेटर के बाद जब विवाद बढ़ता देखा तो अपार्टमेंट के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सीके कालरा ने कहा कि उन्होंने सिर्फ अनुरोध किया था क्योंकि सोसाइटी में योगा करते समय कुछ लोग लूंगी पहन कर आते थे इसकी सोसायटी वासियों ने शिकायत की थी जिसके बाद उन्होंने अनुरोध किया था कि सभ्यता के दायरे में सभ्य कपड़े पहन कर ही सोसाइटी में घूमे। उन्होंने कहा कि लुंगी पहनकर योगा करते समय कुछ लोगों को आपत्ति थी कुछ महिलाओं ने भी इसकी शिकायत की थी जिसके बाद हमने अनुरोध किया कि सभ्य कपड़े पहन कर ही सोसाइटी में घूमे में योगा करें। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और ना ही हमने कोई सर्कुलर या फरमान जारी किया था यह सिर्फ एक अनुरोध था सभी सोसाइटी वासियों के लिए।

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नाइटी को लेकर कोई शिकायत नहीं थी नाइटी को लेकर जो लेटर जारी हुआ था वह हमारी गलती थी। उसके सुधार के लिए हम एक नया नोटिस सोसाइटी के बोर्ड पर चस्पा कर रहे हैं जिसमें सोसायटी में रहने वाले सभी लोगों को पूर्ण आजादी है कि वह अपनी पसंद के कपड़े पहन सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो ड्रेस कोर्ट को लेकर बात कही गई है वह सोसाइटी के कुछ निवासियों के द्वारा शिकायत करने पर की गई थी जिस कारण यह नोटिस जारी किया गया है। ड्रेस कोड के लिए किसी को भी बाध्य नहीं किया जा सकता और ना ही किसी के थोपा गया है। सोसाइटी को किसी की भावनाओं को आघात करने का कोई उद्देश्य नहीं था।

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