नोएडा डिपो में बसों के संचालन में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. नवंबर माह के दौरान अलग-अलग दिनों में कुल 16 बसें बिना किसी पूर्व सूचना के डिपो में खड़ी रहीं, जिससे उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को लगभग 2.92 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ. इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निगम ने 40 से अधिक चालकों और परिचालकों को वसूली नोटिस जारी किया है.
परिवहन निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, नवंबर में एक दिन चार बसें और दूसरे दिन करीब 12 बसें डिपो से बाहर नहीं निकाली गईं. इन बसों को बुलंदशहर, बदायूं और कोटद्वार जैसे रूटों पर संचालन के लिए भेजा जाना था. बसें न चलने से जहां निगम को राजस्व का नुकसान हुआ, वहीं यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
यात्रियों को घंटों करना पड़ा इंतजार
परिवहन विभाग की जांच में सामने आया कि निर्धारित रूट पर बसें न पहुंचने के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा. कई यात्रियों को मजबूरी में निजी वाहनों या महंगे साधनों से यात्रा करनी पड़ी. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में चालकों और परिचालकों ने बसें न चलाने की कोई सूचना डिपो प्रबंधन को नहीं दी. कुछ ने निजी कारणों और घरेलू मजबूरियों का हवाला दिया, जबकि कुछ मामलों में अनुशासनहीनता भी पाई गई.
लापरवाही पर अब होगी कार्रवाई
नोएडा डिपो के एआरएम रोहताश कुमार ने बताया कि बसों के संचालन में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिन चालकों और परिचालकों की वजह से बसें खड़ी रहीं, उनसे नियमानुसार वसूली की जा रही है. कुछ मामलों में परिस्थितियां मजबूरी की थीं, इसलिए वहां आंशिक वसूली की गई है.
निगम ने 40 से अधिक चालकों और परिचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है. इसके अलावा छोटी-मोटी अनियमितताओं के मामलों में 30 से अधिक संविदा परिचालकों पर 200 से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है. परिवहन निगम ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि बिना सूचना बसें खड़ी पाई गईं तो और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. डिपो स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि समय पर बसें रूट पर रवाना हों और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.


