ग्रेटर नोएडा में सरकारी अस्पतालों की भारी कमी, आमजन को राहत दिलाने की उठी मांग

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संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा के आम नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में सरकारी और निजी अस्पतालों के अनुपात में असंतुलन के कारण आम जनता इलाज के लिए निजी अस्पतालों की ओर मजबूर होकर भारी आर्थिक बोझ झेल रही है।

दरअसल, इस गंभीर समस्या को लेकर एक्टिव सिटीजन टीम ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर को एक सामूहिक ज्ञापन सौंपा है। इसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा अस्पताल निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि आवंटन के तरीकों पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख बिंदु:
  • प्राधिकरण द्वारा निजी अस्पतालों के लिए जो प्लॉट स्कीम के तहत निकाले जाते हैं, वे अक्सर उच्च बोली लगाने वाली निजी संस्थाओं द्वारा खरीद लिए जाते हैं, जिससे आम जनता की पहुंच से बाहर हो जाते हैं।
  • जब क्षेत्र में पहले से ही निजी अस्पतालों की संख्या ज्यादा है, तो इन बहुमूल्य प्लॉट्स पर सरकारी अस्पताल क्यों न बनाए जाएं?
  • यदि प्राधिकरण स्वयं इन प्लॉट्स पर अस्पताल बनाए और सरकार उन्हें संचालित करे, तो गरीबों को समय पर इलाज मिल सकेगा।
  • कोविड जैसी महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि कम सरकारी अस्पतालों के कारण कितनी बड़ी समस्या पैदा हो सकती है।

टीम के द्वारा ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि इन प्लॉट्स को निजी संस्थाओं को बेचने के बजाय सरकार खुद अस्पताल बनाए, ताकि हर वर्ग को सस्ता, सुलभ और बेहतर इलाज मिल सके। इससे न सिर्फ आमजन को राहत मिलेगी बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और जनसेवा की छवि भी और मजबूत होगी। इस दौरान एक्टिव सिटीजन टीम से सरदार मंजीत सिंह, आलोक सिंह, हरेंद्र भाटी, रमेश प्रेमचंदनी व आशीष शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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