सोनिया-राहुल गांधी की फिर बढ़ी मुश्किल, नेशनल हेराल्ड केस में नई FIR दर्ज

Sanchar Now
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नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) ने नेशनल हेराल्ड मामले में एक नई एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नाम शामिल हैं. इनके अलावा छह और नाम शामिल हैं. ईडी मुख्यालय द्वारा ईओडब्लू में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है.

एफआईआर में उन पर आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगे हैं. आरोप लगा है कि द एसोसिएटेड जर्नल लि. के पास जितनी संपत्ति थी, उसे हासिल करने के लिए उन्होंने पूरा षडयंत्र रचा. आरोपियों में तीन कंपनियों के भी नाम हैं. ये नाम हैं, एजेएल, यंग इंडिया लि और डोटेक्स एमपीएल. डोटेक्स को शेल कंपनी बताया गया है. यह कोलकाता में रजिस्टर्ड थी. इसने यंग इंडिया लि को एक करोड़ रुपये दिए थे.

प्राप्त जानकारी के अनुसार ईडी ने तीन अक्टूबर को शिकायत की थी. उसके आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है. आपको बता दें कि नेशनल हेराल्ड में पहले से भी मामला दर्ज है. क्या है पूरा मामला, इसे ऐसे समझें.

दरअसल पूरे मामले की शुरुआत 1937-38 से होती है. उस समय द एसोसिएटेड जर्नल नाम से एक कंपनी बनाई गई. कंपनी के निवेशकों में से एक जवाहर लाल नेहरू थे. बाकी के अन्य निवेशक कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए थे. इनकी संख्या करीब पांच हजार के आसपास थी.

द एसोसिएटेड जर्नल ने तीन न्यूज पेपरों का प्रकाशन शुरू किया. ये थे- नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज. कौमी आवाज ऊर्दू में प्रकाशित होता था. नेशनल हेराल्ड अंग्रेजी में और नवजीवन हिंदी में छपता था. कंपनी का कहना था कि इन तीनों ही अखबारों के प्रकाशन की वजह से उसे घाटा हो रहा है. इसलिए 2008 में उसने प्रकाशन बंद कर दिया. इस दौरान कंपनी ने यह भी कहा कि उस पर 90 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है.

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इस लोन को चुकाने के लिए द एसोसिएटेड जर्नल ने कांग्रेस पार्टी से 90 करोड़ रुपये का धन उधार लिया. पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को किसी भी कंपनी के लिए लोन देने का कोई अधिकार नहीं है.

साल 2010 में जिस समय यूपीए की सरकार थी, एक नई कंपनी बनाई गई. इसका नाम रखा गया- यंग इंडिया लि.. इस कंपनी के प्रमुख शेयर धारक थे- सोनिया गांधी और राहुल गांधी. इन दोनों के पास 76 फीसदी हिस्सेदारी थी. अन्य शेयरधारकों में मोतीलाल बोरा, ऑस्कर फर्नान्डिज और सुमन दुबे थे.

स्वामी का आरोप है कि इस यंग इंडिया लिमिटेड ने द एसोसिएटेड जर्नल की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया. उनका ये भी कहना है कि द एसोसिएटेड जर्नल ने 1938 से लेकर 2008 तक जितनी भी संपत्तियों को जमा किया था, सभी पर यंग इंडिया लि. ने कब्जा कर लिया. आरोप ये भी है कि यंग इंडिया लि. ने मात्र 50लाख रुपये में पूरी संपत्ति खरीद ली. इस मामले में सबसे पहले स्वामी ने ही 2012 में शिकायत की थी.

कांग्रेस पार्टी का स्टैंड रहा है कि यंग इंडिया लि. का गठन ‘दान के उद्देश्य से’ किया गया था, न कि लाभ के लिए.

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