अमेरिकी जज ने ट्रंप के बर्थराइट सिटिजन खत्म करने वाले आदेश पर क्यों रोक लगाई? जानें

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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने शासन संभालने के बाद नागरिकता को लेकर कड़े कदम उठाए हैं. ट्रंप ने बर्थराइट सिटिजनशिप में बदलाव करने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब जज ने ट्रंप के इस आदेश पर रोक लगा दी है. जज ने कहा, 40 वर्षों में ऐसा नहीं देखा. दरअसल, अमेरिका में संविधान के 14वें संशोधन के मुताबिक, देश में पैदा होने वाले हर बच्चे को जन्मजात नागरिकता दी जाती है, लेकिन ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में इस में बदलाव करने की बात की है और किन्हीं शर्तों के साथ ही बच्चे बर्थराइट सिटिजनशिप के हकदार होंगे.

ट्रंप के बर्थराइट सिटिजनशिप कानून से अमेरिका में रहने वाले लाखों प्रवासी घबरा गए हैं, लेकिन जज के रोक लगाने के बाद सभी ने राहत की सांस ली है, लेकिन ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. फेडरल जज कफनौर ने गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप के बर्थराइट सिटिजनशिप में बदलाव करने के आदेश पर रोक लगाते हुए इसे “स्पष्ट रूप से असंवैधानिक” कहा.

जज ने क्यों लगाई कानून पर रोक

ट्रंप के इस आदेश के खिलाफ वाशिंगटन, एरिजोना, इलिनोइस और ओरेगन राज्यों ने कोर्ट में अपील की थी इसी के बाद सिएटल स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश जॉन कफनौर ने इस आदेश पर रोक लगाई है. हालांकि, यह रोक अभी अस्थायी (Temporary) है. इस रोक का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप ने जिस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया था वो पूरी तरह से रद्द कर दिया जाएगा. यह रोक महज 14 दिनों के लिए लगाई गई है. साथ ही जज ने इस कानून को अमेरिका के संविधान के खिलाफ कहा है.

जज जॉन कफनौर ने क्या-क्या कहा:

  1. जज ने ट्रंप के आदेश का बचाव कर रहे अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के वकील से कहा, मुझे यह समझने में परेशानी हो रही है कि बार का कोई भी सदस्य कैसे स्पष्ट रूप से कह सकता है कि यह आदेश संवैधानिक है.
  2. मैं पिछले 40 सालों से बेंच पर हूं, लेकिन इन 40 सालों में मैंने ऐसा नहीं देखा. यह घोर असंवैधानिक आदेश है.
  3. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने जज कफनौर (84) को नियुक्त किया था. इस केस में जज कफनौर ने डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अटॉर्नी से इस कानून को लेकर सवाल-जवाब किए. जज ने कहा, डीओजे अटॉर्नी ब्रेट शूमेट से पूछा, क्या शूमेट व्यक्तिगत रूप से मानते हैं कि आदेश संवैधानिक है?
  4. इस आदेश के तहत, आज पैदा होने वाले बच्चों को अमेरिकी नागरिकों के रूप में नहीं गिना जाता है, वॉशिंगटन राज्य के सहायक अटॉर्नी जनरल लेन पोलोज़ोला ने ट्रंप की नीति का जिक्र करते हुए सुनवाई के दौरान जज को बताया.
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जस्टिस डिपार्टमेंट ने दिए जवाब

  1. जस्टिस डिपार्टमेंट ने जज के सवालों पर कहा, डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई संवैधानिक थी और इसे रोकने वाले किसी भी न्यायिक आदेश को “बेहद अनुचित” कहा. इससे पहले कि शुमेट ने पोलोज़ोला के तर्क का जवाब देना समाप्त किया, कफनौर ने कहा कि उन्होंने कानून को रोकने के लिए टेंपरेरी ऑर्डर पर साइन किए हैं.
  2. शुमेट ने कहा, ट्रंप प्रशासन अब जो तर्क दे रहा है, उस पर पहले कभी मुकदमा नहीं चलाया गया था. साथ ही उन्होंने कहा, जज ने जो इस कानून को रोकने के लिए 14 दिन की अस्थायी रोक लगाई है उसकी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि यह 14 दिन की रोक बर्थराइट सिटिजनशिप के कानून के शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगी. बर्थराइट सिटिजनशिप के कानून पर ट्रंप ने 20 जनवरी को साइन किया था और ट्रंप के ऑर्डर के मुताबिक, 20 फरवरी के बाद देश में बर्थराइट सिटिजनशिप का कानून लागू होगा.
  3. वकील ने बाद में एक बयान में कहा कि वह राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश का “बचाव” करेंगे.

क्या लग जाएगी हमेशा के लिए रोक?

जज ने ट्रंप के बर्थराइट सिटिजनशिप कानून पर फिलहाल जो रोक लगाई है जो अस्थायी है. यह परमानेंट रोक नहीं है. जज ने इस कानून पर महज 14 दिन के लिए फिलहाल रोक लगाई है. वहीं, दूसरी तरफ जज की तरफ से रोक लगाई जाने के फौरन बाद ट्रंप ने कहा, हम इसके खिलाफ अपील करेंगे. इसका मतलब है कि यह सोच लेना कि यह कानून पूरी तरह से रोक दिया गया गलत है.

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ट्रंप ने क्या ऐलान किया

  1. डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही 20 जनवरी को जन्मजात नागरिकता को लेकर एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया. अमेरिका के संविधान के 14वें संशोधन के तहत देश में पैदा होने वाला हर बच्चा देश की जन्मजात नागरिकता का हकदार है, लेकिन ट्रंप ने इसमें बदलाव की मांग की है, जिसके तहत अब देश में वो ही बच्चे जन्मजात नागरिकता के हकदार है जिनकी मां या पिता, दोनों में से कोई एक अमेरिकी नागरिक हो.
  2. ट्रंप के आदेश के तहत, 19 फरवरी के बाद अमेरिका में पैदा हुए किसी भी बच्चे, जिनके माता और पिता अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी नहीं हैं, निर्वासन के अधीन होंगे और उन्हें देश की जन्मजात नागरिकता नहीं दी जाएगी. इसके चलते बच्चे सामाजिक सुरक्षा, विभिन्न तरह के सरकारी लाभ नहीं हासिल कर सकेंगे.
  3. अमेरिका दुनिया के उन 30 देशों में से एक है जहां बच्चों को जन्मजात नागरिकता दी जाती है. कनाडा, मेक्सिको भी इसमें शामिल हैं.
  4. डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों के अनुसार, अगर ट्रंप के आदेश को कायम रहने दिया गया तो सालाना 150,000 से अधिक बच्चे देश में जन्मजात नागरिकता के हकदार नहीं होंगे.

देश में उठी इस कानून के खिलाफ आवाज

ट्रंप ने इस कानून को लागू करने के लिए 30 दिन का समय दिया था, जिसके तहत 19 फरवरी के बाद अमेरिका में पैदा हुए हर बच्चे को जन्मजात नागरिकता नहीं दी जाएगी. इसी के बाद देश में लोग घबरा गए. ऐसी तस्वीर सामने आई जो बहुत ही भयावह है. अस्पतालों के बाहर प्रेगनेंट महिलाओं की लाइन लग गई. जो वक्त से पहले बच्चे की डिलीवरी की मांग कर रही थी, जिससे उनका बच्चा 19 फरवरी से पहले पैदा हो जाए और अमेरिका की जन्मजात नागरिकता उसको मिल जाए.

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इसी के चलते देश में इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई गई. जब से ट्रंप ने आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, इसे चुनौती देते हुए अब तक 6 मुकदमे दायर किए गए हैं, उनमें से अधिकांश नागरिक अधिकार समूहों और 22 राज्यों के डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल ने दायर किए हैं. राज्यों ने तर्क दिया कि ट्रंप के आदेश ने अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता खंड में निहित अधिकार का उल्लंघन किया है. जिसके तहत यह प्रावधान है कि अमेरिका में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति नागरिक है.

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