यूपी की योगी सरकार ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आबकारी विभाग में एक बार फिर कड़ी कार्रवाई की है। नोएडा के जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है और विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। यह कदम मदिरा दुकानों पर ओवररेटिंग के मामलों को गंभीरता से लेने के तहत उठाया गया।
आबकारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार में आमजन के हितों से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। मदिरा बिक्री में अनियमितता, ओवररेटिंग या भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी शिकायतों पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि प्रदेश में पारदर्शी और अनुशासित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
ओवररेटिंग की जांच और रिपोर्ट
नोएडा में मदिरा दुकानों पर निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूले जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर तत्कालीन उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह (मेरठ प्रभार) ने विस्तृत जांच और निरीक्षण किया।
जांच के दौरान:
- 23 दिसंबर 2024 को 9 दुकानों पर ओवररेटिंग पाई गई
- 20 जनवरी 2025 को 16 दुकानों पर ओवररेटिंग की पुष्टि हुई
जांच रिपोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद आबकारी मंत्री ने त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की।
नई आबकारी नीति 2026-27: डिस्टलरी प्लांट्स को बढ़ावा
औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन
प्रदेश सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और राजस्व संसाधनों को सशक्त बनाने के लिए नई आबकारी नीति 2026-27 पर काम कर रही है। नीति के तहत प्रदेश में डिस्टलरी प्लांट्स की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके मुख्य बिंदु हैं:
- निवेशकों के लिए सरल और पारदर्शी लाइसेंस प्रक्रिया
- शुल्क संरचना को युक्तिसंगत बनाना
- आवश्यक अनुमतियों में सहूलियत
नई नीति से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार
आबकारी विभाग नई नीति के माध्यम से निर्यात को भी बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है। नीति में निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए:
- नियमों में ढील
- लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाना
- अतिरिक्त प्रोत्साहन
इन कदमों से प्रदेश में उत्पादित स्पिरिट, अल्कोहल और अन्य संबंधित उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे और विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि होगी।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
डिस्टलरी प्लांट्स के विस्तार से कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ेगी।
- गन्ना, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की खपत में वृद्धि
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसरों का सृजन
इस नीति से प्रदेश के आबकारी उद्योग का समग्र विकास होगा और उत्तर प्रदेश डिस्टिलरी उद्योग में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।

