नोएडा: पापा, मुझे बचा लो… फोन पर इंजीनियर बेटे की ये गुहार सुनकर राजकुमार मेहता घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बाद भी उस जगह पहुंचे थे, जहां उनका बेटा कार सहित ड्रेनेज में डूब रहा था. वहां पहुंचने पर उन्होंने बेटे को बचाने के लिए पुलिस को कॉल किया, पुलिस पहुंची भी, लेकिन रात के अंधेरे में कार सहित ड्रेनेज में डूबे युवराज को बाहर निकालने के रिसोर्स पुलिस टीम के पास नहीं थे. इंजीनियर बेटा नीचे पानी में डूब रहा था, ऊपर लाचार पिता अपनी पूरी ताकत लगा रहा था, लेकिन अफसोस वो बेटे को बचा नहीं पाया. जवान बेटे को खोने के बाद पिता की स्थिति बदहवास जैसी हो गई है. एनडीटीवी से बात करते हुए वो फूट-फूट कर रोने लगे. कहा- बेटे को बचाने के लिए मैंने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन उसे बचा नहीं पाया.
नोएडा के सेक्टर 150 में हुआ दर्दनाक हादसा
दरअसल नोएडा के सेक्टर-150 में शुक्रवार की रात एक 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई. युवराज गुरुग्राम की एक कंपनी में जॉब करते थे. शुक्रवार की रात वह ऑफिस से घर ग्रेटर नोएडा आ रहे थे. घना कोहरा था और विजिबिलिटी काफी कम होने के कारण वह एक मोड़ पर युवराज की कार कंट्रोल से बाहर हो गई. युवराज जब नोएडा के सेक्टर-150 एटीएस ले-ग्रैडियोज के पास टी-प्वाइंट पर पहुंचे, तो कार अनियंत्रित हो गई. कार नाले की दीवार तोड़कर एक निर्माणाधीन मॉल के परिसर में जा गिरी, जहां पानी भरा हुआ था.
युवराज के पिता ने लापरवाही से मौत का आरोप लगाया
कार के पानी में गिरने के बाद युवराज ने बाहर निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए. आखिरकार युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई. कार के पानी में गिरने के बाद युवराज ने अपने पिता को फोन कर घटना की जानकारी दी थी. जिसके बाद पिता भी वहां पहुंचे थे. लेकिन उनके सामने ही बेटे की तड़प-तड़पकर मौत हो गई. युवराज के पिता ने लापरवाही से मौत का आरोप प्रशासन पर लगाया है.
मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे युवराज
युवराज मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे, वो गुरुग्राम स्थित डनहमबी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे. उनके परिजनों ने बताया कि युवराज की मां का दो साल पहले देहांत हो गया था और उनकी बहन ब्रिटेन में रहती हैं. युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने एनडीटीवी को बताया कि युवराज ने परीक्षा पास करने और अपना करियर बनाने के लिए बहुत मेहनत की थी.
मैंने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन… पिता का दर्द
राजकुमार मेहता ने बताया कि शुक्रवार शाम को युवराज का फोन और मैसेज आया, जिसमें उसने बताया कि उसकी कार खुले नाले में गिर गई है. वह तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस व दमकल टीम को बुलाया. टीम 15 मिनट के भीतर पुलिस टीम वहां पहुंच गई, लेकिन युवराज की जान बचाने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे. युवराज रात 12 बजे से लेकर आधी रात 2 बजे तक कार की छत पर फंसा रहा.
बेटे की पुकर- पापा मुझे बचा लो
युवराज कार को डूबने से बचाने के लिए छत पर लेट गया था ताकि उसका शरीर संतुलन बना रहे. वह अपने फोन की फ्लैशलाइट से बता रहा था कि वह कहां फंसा है. आखिरकार फ्लिपकार्ट के डिलीवरी एजेंट मोहिंदर उसे बचाने के लिए अंदर गए, लेकिन तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी. हम उसे अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. युवराज के पिता ने बताया कि मैंने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की. मैं हर जगह भागता रहा ताकि कोई आकर उसे वहां से निकाल ले, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. अपने आखिरी पलों में वह लगातार ‘पापा मुझे बचा लो’ कह रहा था.

