बलिया में 4 दिन में 57 लोगों की मौत, शासन ने लिया संज्ञान, जांच के लिए लखनऊ से पहुंची टीम

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उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में जिला अस्पताल में पिछले दिनों हुई अप्रत्याशित मौतों के कारणों की जांच करने लखनऊ से जांच टीम रविवार को बलिया पहुंची। टीम ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के रक्त ,यूरीन आदि के नमूने भी लिए। ज्यादातर मरीजों में बुखार, सांस व सीने में दर्द की शिकायत दर्ज की गई। जिला अस्पताल में संवाददाताओं से बातचीत में संचारी विभाग के निर्देशक डॉ. एक. के. सिंह ने बताया कि सभी मरीजों में प्रथम द्दष्टया सीने में दर्द व सांस फूलने की समस्या देखने को मिल रही है। ज्यादातर मरीज इन समस्याओं से ग्रसित हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों के अनुसार सबसे पहले उन्हें सीने में दर्द हुआ फिर उन्हें बुखार हो गया और सांस फूलने लगी। मरीजों के रक्त, यूरीन, सीरम व स्टूल के नमूने लिए जाएंगे व उनकी जांच की जाएगी। सभी जांचों की रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है।

सबसे ज्यादा बांसडीह ब्लाक के 16 तो गढ़वार ब्लाक के 11 मरीजों की मौत हुई

उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्यादातर मरीज जनपद के बांसडीह व गढ़वार ब्लाक के हैं, जिनमें बांसडीह ब्लाक के 16 तो गढ़वार ब्लाक के 11 मरीजों की मौत हुई है। इन ब्लाकों में टीम घर-घर जाकर बीमारी के कारणों की जांच करेगी। इन क्षेत्रों में आवश्यक पड़ने पर जल आदि की भी जांच कराई जाएगी। अस्पताल में भर्ती ज्यादातर मरीज हृदय रोग, रक्तचाप, किडनी जैसी अन्य बीमारियों से भी पीड़ित हैं और कम उम्र के मरीजों में सांस व सीने में दर्द की शिकायत दर्ज की गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि जिला अस्पताल में हुई मौतों का आंकड़ा असामान्य है। उन्होंने दावा किया कि मौतों का कारण प्रथम द्दष्टया मौसम की गड़बड़ी नहीं है। अगर मौसम की बात होती तो इस पास के जनपद भी प्रभावित होते।

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हीटवेव से ग्रसित मरीजों में सबसे ज्यादा तेज बुखार व अचेत होने की पाई जाती है समस्याएं

उन्होंने बताया कि हीटवेव से ग्रसित मरीजों में सबसे ज्यादा तेज बुखार व अचेत होने की समस्याएं पाई जाती है पर यहां सीने में दर्द व सांस फूलने के मामले ज्यादा दर्ज किए गए हैं । बुखार की परेशानी तीसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि मौतों के अधिक आंकड़े वाले ब्लाक गढ़वार व बांसडीह दोनों ओर से नदियों से घिरे हुए हैं, लिहाज़ा जलवायु विभाग से जलवायु जांच के अनुरोध भी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ज़्यादातर मरीजों की अभी जांच नहीं हो पाई है कि उन्हें किस प्रकार का संक्रमण है। जांच उपरांत ही कुछ कहा जा सकता है।

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