फतेहपुर के मकबरे में तोड़फोड़, पूजा करने पहुंचे थे हिंदू, पुलिस के आश्वासन से लौटे; भारी पुलिस बल तैनात

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फतेहपुर: जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के आबूनगर में स्थित नवाब अब्दुल समद मकबरे पर सोमवार को भगवा झंडा लगाने पर बवाल हो गया. हिंदू संगठनों के लोग सुबह-सुबह मकबरे पर पहुंचे. ठाकुर जी का मंदिर होने का दावा करते हुए तोड़फोड़ करने लगे. इसके बाद कुछ युवकों ने छत पर चढ़कर भगवा झंडा लगा दिया. मकबरे पर भगवा झंडा देख मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क गए और पत्थरबाजी करने लगे.

सड़क पर कर रहे हनुमान चालीसा पाठः वहीं, बवाल की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. बवाल कर रहे लोगों को लाठीचार्ज कर खदेड़ा. तनाव को देखते हुए मौके पर थाना सदर कोतवाली, राधा नगर, मलवा, हुसैनगंज और थरियांव थाने सहित अन्य थानों की फोर्स तैनात है. डीएसपी गौरव शर्मा, एएसपी महेंद्र पाल सिंह समेत एडीएम अवनीश त्रिपाठी सहित जिला प्रशासन के लोग मौके पर मौजूद हैं. प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं, हिंदू संगठन के हजारों कार्यकर्ता मकबरे से करीब 50 मीटर दूर सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं.

एक दिन पहले दी थी पूजा करने की चेतावनीः आबूनगर इलाके में नवाब अब्दुल समद मकबरा को लेकर बीजेपी और हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है. बीजेपी के जिला अध्यक्ष मुखलाल पाल खुद इस अभियान की अगुवाई करने में लगे है. उन्होंने एक दिन पहले रविवार को खुले लहजे में चेतावनी दी थी कि सोमवार 11 अगस्त 2025 को मकबरे में भीतर मौजूद शिव मंदिर की पूजा अर्चना करेंगे. मुखलाल पाल का कहना है कि मकबरे के भीतर शिव लिंग मौजूद है. मकबरे के बरामदे में नंदी जी विराजमान रहा करते थे. हिंदू संगठनों का कहना है कि मकबरे की दीवारोंं और गुंमदों में फूल, त्रिशूल जैसी कला कृतियां उकेरी गई है. फतेहपुर में मठ मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति ने मकबरे में मंदिर होने का दावा किया है और जिलाधिकारी को एक पत्र देते हुए मकबरे में पूजा अर्चना करने की बात कही थी.

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मकबरे में शिवलिंग होने का दावाः मुखपाल का दावा है कि कई साल पहले एक युवक ने मकबरे के भीतर शिव लिंग की बात को प्रमाणित भी किया है. कुमार संभव ने बताया कि वह साल 2007-2008 में मजार पर गया था. उस समय दक्षिण दिशा में शिवलिंग था, जिसपर दीपक जलाकर आया था. इसके बाद साल 2011 के आसपास मंदिर के स्वरूप से छेड़छाड़ की गई थी. हरे रंग से पुताई कर हिंदू धर्म के चिन्हों को हटा दिया गया है.

500 साल पुराना मजार होने का दावाः वहीं, राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने जिलाधिकारी को एक लिखित में शिकायत करते हुए जिला प्रशासन से मकबरे के स्वरूप से छेड़छाड़ ना करने की अपील की थी. तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने मकबरे के पूरे एरिए को सील कर दिया है. साथ ही बैरिकेटिंग करके किसी को भी भीतर जाने की परमीशन नहीं दी. मकबरे के मुतवल्ली मो. नफीस के मुताबिक मकबरा करीब 500 साल पुराना है. यहां पर अबू मोहम्मद और अबू समद की मजारें हैं, जिसे अकबर के पोते ने बनवाया था. करीब 10 साल में ये मकबरा बनकर तैयार हुआ था. वहीं, शहर काजी अब्दुल्ला शईदुल्ल इस्लाम ने वीडियो जारी करके लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

मौके पर स्थिति सामान्यः वहीं, डीएम रवींद्र सिंह ने कहा कि मकबरे पर दोनों पक्षों से लोग आए थे. क्योंकि उन्हें आशंका थी और कुछ असामाजिक तत्व अफवाहें फैला रहे थे. जब लोग यहां आए तो उन्हें सारी बातें समझाई गई और बताई गई. उनसे बात करके उन्हें आश्वासन दिया गया है कि कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जाएगा. हमारी प्राथमिकता है कि कानून व्यवस्था सामान्य रहे. अभी मौके पर स्थिति सामान्य है. एसपी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि अराजकता फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है. तनाव पूर्ण माहौल बनाने को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी.

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एडीजी संजीव ने किया निरीक्षणः एडीजी संजीव कुमार गुप्ता मौके पर पहुंचे और पुलिस टीम को सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने के सख्त निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पुलिस की छोटी छोटी टीम बना कर अलग-अलग जगह लगाई जाए और उनकी जिम्मेदारी तय की जाए. अगर किसी से कोई लापरवाही होती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. जांच पड़ताल के बाद लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी.

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