संचार नाउ। भारत की उच्च शिक्षा और तकनीकी भविष्य को नई दिशा देते हुए गलगोटियास विश्वविद्यालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में ₹350 करोड़ से अधिक का ऐतिहासिक निवेश किया है। यह किसी निजी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया देश का अब तक का सबसे बड़ा एआई निवेश माना जा रहा है, जो निजी संस्थानों की राष्ट्रीय तकनीकी नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
दरअसल, इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत विश्वविद्यालय ने एक अत्याधुनिक, विशेष रूप से निर्मित एआई कॉम्प्लेक्स विकसित किया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा, शोध और वास्तविक अनुप्रयोगों को एकीकृत करना है। यह निवेश केवल अवसंरचना विस्तार नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा—विशेषकर अमेरिका और चीन जैसे देशों—में स्थिति मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
गलगोटियास विश्वविद्यालय ने एनवीडिया, सिस्को, टाटा टेक्नोलॉजीज़, आईआईटी मंडी और एचसीएलटेक जैसे वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर के अग्रणी संस्थानों के साथ मिलकर कई सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं। इन प्रयासों को टेक महिंद्रा, वीवो और विप्रो जैसी कंपनियों का सहयोग भी प्राप्त है, जिससे एक मजबूत अकादमिक-इंडस्ट्री इकोसिस्टम तैयार हुआ है।
इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एनवीडिया के अत्याधुनिक डीजीएक्स एच200 एआई सुपरकंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म की तैनाती शामिल है। इसके साथ ही गलगोटियास विश्वविद्यालय उन चुनिंदा वैश्विक संस्थानों में शामिल हो गया है जो बड़े पैमाने पर एआई मॉडल प्रशिक्षण और उन्नत शोध करने में सक्षम हैं। यह प्लेटफॉर्म जेनरेटिव एआई, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स, कंप्यूटर विज़न और डेटा साइंस जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में शोध को गति देगा।
छात्रों को इस निवेश का सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें एंटरप्राइज़-ग्रेड एआई टूल्स और वास्तविक उद्योग-आधारित समस्याओं पर काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे स्नातक होते ही उद्योग के लिए पूरी तरह तैयार होंगे। वहीं फैकल्टी और शोधकर्ताओं के लिए यह पहल उच्च स्तरीय रिसर्च, नवाचार और पेटेंट विकास के नए द्वार खोलेगी।
गलगोटियास विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा कि जब भारतीय संस्थान इस स्तर पर निवेश करते हैं, तो एआई में भारत की वैश्विक नेतृत्व की महत्वाकांक्षा वास्तविकता में बदलने लगती है। ₹350+ करोड़ का यह निवेश न केवल गलगोटियास विश्वविद्यालय, बल्कि पूरे निजी उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक नया मानक स्थापित करता है और भारत को एआई महाशक्ति बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।
