रुड़की। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएनएसटी), मोहाली के सहयोग से ऐसा स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज विकसित किया है, जो शरीर की प्राकृतिक गतिविधियों से ऊर्जा लेकर घाव भरने में मदद कर सकता है। 3डी-माइडास नामक यह तकनीक बिना बैटरी, तार या बाहरी ऊर्जा स्रोत के विद्युत संकेत उत्पन्न करती है।
तकनीक की विशेषताएँ
यह तकनीक शरीर के हिलने-डुलने से उत्पन्न यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत उत्तेजना में बदलती है। लचीली और वायु-संचार योग्य संरचना घाव से निकलने वाले द्रव के प्रबंधन में भी मदद करती है। इसे शरीर की गतिविधियों के अनुरूप ढलने के लिए मूल लंबाई से करीब 800 प्रतिशत तक खिंचने योग्य बनाया गया है। प्रयोगशाला परीक्षण में इस तकनीक से नियंत्रण की तुलना में करीब तीन गुना अधिक कोशिका प्रसार और 2.5 गुना अधिक कोशिका प्रवासन देखा गया।
पशु परीक्षण
पशु परीक्षण में 13 से 15 दिनों में करीब 90 से 95 प्रतिशत तक घाव बंद होने के साथ नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण में भी वृद्धि हुई। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने इसे उन्नत सामग्री और अंतर्विषयक शोध से स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौती का समाधान करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। प्रधान अन्वेषक प्रो. कौशिक पारिदा ने कहा कि शरीर की गतिविधियों से ही विद्युत उत्तेजना पैदा होने से भविष्य में अधिक सुविधाजनक और स्व-संचालित घाव देखभाल तकनीक विकसित हो सकती है। शोध में कोशिका अनुकूलता और ऊतक पुनर्जनन के भी उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।
