गर्भ में पल रहे पांच महीने से बड़े शिशु को भी माना जाएगा व्यक्ति, हाईकोर्ट ने दिया मुआवजा देने का आदेश

Sanchar Now
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा है कि अगर गर्भ में पल रहा बच्चा 5 महीने से ज्यादा का है, तो कानून उसे एक व्यक्ति मानता है. ऐसे में अगर किसी हादसे में उसकी मौत हो जाती है, तो परिवार को उसके लिए अलग से मुआवजा मिलना चाहिए.

हाईकोर्ट ने यह फैसला एक गर्भवती महिला की मौत से जुड़े मामले में सुनाया है. जो ट्रेन में चढ़ते समय गिर गई थी. हादसे में महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे दोनों की मौत हो गई थी. पहले रेलवे दावा अधिकरण ने सिर्फ महिला की मौत के लिए मुआवजा दिया था, बच्चे के लिए नहीं. इसी को लेकर रेलवे और महिला के परिजन कोर्ट पहुंचे थे.

कोर्ट के फैसले से लोगों को राहत

अब हाईकोर्ट ने कहा कि 5 महीने से ज्यादा का भ्रूण एक स्वतंत्र जीवन की तरह माना जाएगा, इसलिए उसकी मौत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. अदालत ने आदेश दिया कि बच्चे की मौत के लिए भी परिवार को अलग से मुआवजा दिया जाए. कोर्ट के आदेश के बाद न सिर्फ इस मामले में राहत मिली है. बल्कि आने वाले समय में इस तरह के हर मामले में यह नियम लागू होने से लोगों को राहत मिलेगी.

रेलवे ने कर दिया था मुआवजा देने से इनकार

जस्टिस प्रशांत कुमार ने रेलवे दावा अधिकरण, लखनऊ के एक आदेश के खिलाफ प्रथम अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है. अधिकरण ने पूर्व में केवल एक गर्भवती महिला की मृत्यु के लिए मुआवजा मंजूर किया था. जबकि अजन्मे बच्चे के लिए राहत से साफ इनकार किया था. इसी के बार महिला के परिजनों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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कब का है पूरा मामला?

यह मामला दो सितंबर, 2018 की घटना से जुड़ा है, जिसमें आठ से नौ माह की गर्भवती भानमती ट्रेन पर चढ़ते समय गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं. बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई और साथ ही उनके अजन्मे बच्चे की भी मृत्यु हो गई.

अधिकरण ने अप्रिय रेलवे घटनाओं से जुड़े प्रावधानों के तहत महिला की मृत्यु के लिए आठ लाख रुपये का मुआवजा दिया था, लेकिन मुआवजे के लिए उस भ्रूण को एक अलग इकाई नहीं माना था. पीड़ित परिवार ने बाद में इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी.

अदालत ने स्पष्ट किया कि रेलवे अधिनियम के तहत अधिकारी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देने के उत्तरदायी हैं. इस तरह का उत्तरदायित्व दुर्घटना में एक अजन्मे बच्चे की मृत्यु सहित सभी जनहानि पर लागू होता है. अदालत ने भ्रूण की मृत्यु के लिए अधिकरण को अलग से मुआवजा देने का निर्देश दिया.

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