लखनऊ। मन्दिरों से चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्र के पहले ही दिन सोमवार को विधान परिषद में जमकर हंगामा हुआ। सपा के सदस्यों ने दो बार वेल में पहुंच कर खूब नारेबाजी की। इस दौरान हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही 15-15 मिनट के लिए दो बार स्थगित करनी पड़ी। इस पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के जवाब में नेता सदन केशव मौर्य ने कहा कि बाबर से रिश्ता जोड़ने वाले राम मंदिर की बात कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी का विरोध
विधान परिषद में शून्य प्रहर के दौरान समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया। किरन पाल कश्यप ने कहा कि चढ़ावा चोरी तो 1990 से हो रही थी। अब चढ़ावा चोरी पकड़ी गई है। मान सिंह यादव ने कहा कि दान की वस्तु का हरण करना सबसे बड़ा पाप होता है। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि ट्रस्ट में संतों और महात्माओं को रखा जाना चाहिए था लेकिन बीजेपी और आरएसएस का ट्रस्ट बना दिया। ट्रस्ट में 15 में से 12 सदस्य आरएसएस के हैं और तीन सरकार ने नामित किए हैं। मंदिर बनाया तो माता सीता को गायब कर दिया। भगवान राम आपसे बहुत नाराज हैं। करोड़ों रुपये से बने मंदिर की छत टपकने लगी, सड़क धंस गई और बाउंड्री गिर गई। भगवान राम की कुदृस्टि से ही आप अयोध्या में हारे। फिर भी आपको कुछ समझ नहीं आ रहा।
नेता सदन का जवाब
जवाब में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि 500 साल बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना। इसके लिए अनेक बलिदान हुए। आपने तो निहत्थे राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं। इसी बीच सपा सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। सपा सदस्य नेता सदन का जवाब सुनने को तैयार ही नहीं थे और लगातार नारेबाजी करते रहे।
सदन की कार्यवाही स्थगित
इस दौरान नेता सदन ने भी जवाब देना जारी रखा हुआ था नतीजा कौन क्या कह रहा यह स्पष्ट सुनना संभव नहीं हो पा रहा था। 13 मिनट के बाद सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने सदन की कार्यवाही यह कहते हुए 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी कि सरकार का जवाब जारी रहेगा। 15 मिनट बाद सभापति ने सदन के स्थगन का समय 15 मिनट और बढ़ा दिया। दोपहर 1.36 बजे सदन की कार्यवाही जैसे शुरू हुई और नेता सदन अपनी बात रखने लगे तो विपक्षी सपा सदस्य फिर से वेल में पहुंच कर नारेबाजी करने लगे।
इस दौरान नेता सदन ने वक्तव्य जारी रखा। नारेबाजी और सरकार के वक्तव्यों का सिलसिला समानान्तर जारी रहने से कुछ भी स्पष्ट रूप से सुना नहीं जा सका। करीब 16 मिनट बाद जब केशव मौर्य ने अपना वक्तव्य समाप्त किया तो सभापति से कार्यस्थगन को अस्वीकार कर सरकार को आवश्यक कार्यवाही के लिए संदर्भित करने की घोषणा की तब जाकर सपा सदस्य शांत हुए और अपनी-अपनी सीटों पर लौट आए。
