संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिसूचित 44 गांवों के किसानों ने 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड की वर्षों पुरानी मांग को लेकर गुरुवार को सेक्टर अल्फा-1 स्थित ग्रेटर नोएडा जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की। किसानों ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के अधिकारी लगातार उन्हें आश्वासन देकर मामले को टाल रहे हैं, जबकि उनके अधिकारों का अब तक समाधान नहीं किया गया है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि इस बार आंदोलन आर-पार की लड़ाई होगा और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
दरअसल, प्रेस वार्ता में प्रकाश प्रधान ने बताया कि वर्ष 2010 में हुए किसान आंदोलन के बाद तत्कालीन सरकार के स्तर पर किसानों और प्राधिकरण के बीच समझौता हुआ था, जिसमें 64.7 प्रतिशत बढ़े हुए मुआवजे के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड देने पर सहमति बनी थी। बाद में अधिकांश किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा तो मिल गया, लेकिन अतिरिक्त आबादी भूखंड का लाभ बड़ी संख्या में किसान आज भी नहीं पा सके।
उनका का आरोप है कि समय-समय पर प्राधिकरण की ओर से केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कई बार बोर्ड बैठकों में प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रेस वार्ता के दौरान सतपाल प्रधान ने दावा किया कि उनकी आवाज शासन और मुख्यमंत्री तक पहुंचने ही नहीं दी जा रही है। अधिकारियों के स्तर पर ही मामले को रोक दिया जाता है, जिसके कारण किसानों की वर्षों पुरानी मांग लंबित पड़ी हुई है। किसानों ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यदि उनकी बात सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच जाए तो उनके साथ न्याय होगा और उन्हें उनका वैधानिक अधिकार मिल जाएगा।
राकेश बिरोड़ी व धर्मेंद्र मयचा ने यह भी आरोप लगाया कि आबादी भूखंड के आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई मामलों में भेदभाव किया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और सभी पात्र किसानों को समान रूप से उनका अधिकार देने की मांग की।
प्रेस वार्ता में मुखिया बीडीसी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और शासन-प्रशासन की होगी। उनका कहना था कि अब किसान केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि अपने अधिकार की लड़ाई निर्णायक रूप से लड़ेंगे।
